भारतकोश
मेघदूतम् (वैद्यनाथ झा शास्त्री हिन्दी टीका सहित)

मेघदूतम् (वैद्यनाथ झा शास्त्री हिन्दी टीका सहित)

Meghadutam of Kalidasa Hindi

महाकवि कालिदास द्वारा

स्रोत: Meghadutam with Sanskrit text and Hindi Commentary by Pt. Vaidyanath Jha Shastri (उद्गम)

DevanagariHindipublished335 पृष्ठ

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भूमिका

संस्कृत साहित्य से सम्बद्ध ऐसा कौन व्यक्ति होगा जो स्वनामधन्य सर्वमूर्धन्य कवि एवं सुनिपुण नाटककार कविकुल-गुरु “कालिदास” को न जानता हो। जिनका यशःसौरभ शकुन्तलानाटक के माध्यम से समस्त विश्व को सुवासित कर रहा है, जिनकी काव्य-मधुरिमा पर क्या प्राच्य और क्या भारतीय समस्त सहृदयगण लट्टू हैं। “कविकुलमूर्धन्य” नाम वाली पगड़ी जिनके सम्पर्क में सार्थक हुई उन कविकुल-सुधाकर “कालिदास” को कौन नहीं जानता ? आपकी प्रतिभा सर्वतोमुखी है, खण्डकाव्य, महाकाव्य और नाटक सर्वत्र ही आपकी कवित्व-शक्ति पूर्णरूप से परिपक्व दिखाई पड़ती है। आप भारत के ही नहीं अपितु समस्त विश्व के महाकवियों में सर्वप्रथम गिने जाने वाले महाकवि हैं। काव्य के तीनों विधाओं में आपके समान विश्व का कोई भी कवि ऐसा मनोरम काव्य-प्रणयन नहीं कर सका। प्रकृति के मनोरम चित्रण करने में एवं अपनी रचनाओं के पात्रों के चरित्र का असाधारण चित्रण करने में महाकवि अद्वितीय हैं। इनकी रचनाओं में नाट्यकला की सुन्दरता का अवलोकन कीजिए या महाकाव्य का वर्णन-सौन्दर्य देखिये अथवा गीतिकाव्य के सरस करुण हृदयोद्गारों का आनन्द लीजिए, सब उपर्युपरि है। महाकवि में वह अप्रतिम चमत्कार है जिस पर समस्त विश्व आश्चर्यान्वित हो रहा है, इनमें ऐसी ब्रह्माण्डव्यापिनी सर्वातिशायिनी प्रतिभा है जिसका एकत्र समागम संसार में दुष्प्राप्य है। आध्यात्मिक रहस्य का ऐसा सरस प्रतिपादन अन्यत्र दुर्लभ है। इनकी शान्तिप्रदायिनी उपदेशमयी कविताकौमुदी जिज्ञासुजन के जिज्ञासातप्त हृदय को आनन्द-सागर की लहरों में ऐसा डुबो देती है कि उससे निकलने का नाम नहीं लेना चाहता।। इनकी कविता में अपनी शकुन्तला की तरह अनाघ्रात पुष्प की ताजगी, अखण्डित किसलयों की कोमलता, अनास्वादित रस का माधुर्य तथा अखण्ड सौभाग्यशाली पुण्यों के फल की पवित्रता आदि का समवाय मिलता है। इस कलाकार की कला में केवल रसिकता ही नहीं अपितु समाज-विज्ञान का भी अपूर्व एवं अद्भुत दर्शन होता है। संस्कृत साहित्य के एकमात्र