भारतकोश
मेघदूतम् (वैद्यनाथ झा शास्त्री हिन्दी टीका सहित)

मेघदूतम् (वैद्यनाथ झा शास्त्री हिन्दी टीका सहित)

Meghadutam of Kalidasa Hindi

महाकवि कालिदास द्वारा

स्रोत: Meghadutam with Sanskrit text and Hindi Commentary by Pt. Vaidyanath Jha Shastri (उद्गम)

DevanagariHindipublished335 पृष्ठ

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कालिदास ही ऐसे कवि हैं जिन्होंने अपनी कविता में अपने युग की चेतना को रूपायित किया है (बाण को छोड़कर)। इनका काव्य भारत के प्राचीन इतिहास के देदीप्यमान युग का प्रकाश-स्तम्भ और पौराणिक ब्राह्मण-धर्म तथा वर्णाश्रम धर्म का वास्तविक प्रतीक है।

जीवन :—दुःख है कि हम अपने इस महाकवि के जीवन के विषय में 'इदमित्थम्' नहीं कह सकते क्योंकि ऐसा कोई निश्चयात्मक प्रमाण उपलब्ध नहीं हो सका है। महाकवि स्वयं इतने बड़े निरभिमानी थे कि अपने सम्बन्ध में इन्होंने नाम के प्रयोग को छोड़कर और कुछ लिखा ही नहीं। आत्मश्लाघा से ये कितनी दूर रहते थे एवं ये कितने विनम्र थे इसका परिचय हमें इनके रघुवंश महाकाव्य के निम्नलिखित पद्यों में मिलता है—

क्व सूर्यप्रभवो वंशः क्व चाल्पविषया मतिः।
तितीर्षुर्दुस्तरं मोहादुडुपेनास्मि सागरम्॥
मन्दः कवियशः प्रार्थी गमिष्याम्युपहास्यताम्।
प्रांशुलभ्ये फले लोभादुद्बाहुरिव वामनः॥
रघूणामन्वयं वक्ष्ये तनुवाग्विभवोऽपि सन्।
तद्गुणैः कर्णमागत्य चापलाय प्रचोदितः॥ (रघु०, १–२।३।९॥)

अतः ये कब और कहाँ उत्पन्न हुए? ऐसे महारत्न का जन्म किस स्तुत्य दम्पति ने दिया, एवं ये कब परलोक सिधारे—इन सब बातों का समुचित एवं सन्तोषप्रद उत्तर हमें नहीं प्राप्त हो सका है।

ऐसी जनश्रुति है कि महाकवि पहले महामूर्ख थे। किसी शारदानन्द नामक राजा की पुत्री विद्योत्तमा विदुषी एवं परम-सुन्दरी थी। अपनी विद्या के गर्व के कारण उसने 'शास्त्रार्थ में जो पुरुष मुझे परास्त करेगा उसी से मैं अपना विवाह करुँगी' ऐसी प्रतिज्ञा कर ली थी। तात्कालिक विद्वान् लोग उससे परास्त होकर ईर्ष्यावश उसका दर्प-भंग करने के लिए उसका विवाह किसी महामूर्ख से कराना चाहते थे, और सब मिलकर ऐसे मूर्ख को खोजने लगे। कहा जाता है कि कालिदास वृक्ष की डाल पर बैठकर उसी डाल को इस तरह काट रहे थे जिससे उसके कटने पर डाल सहित कालिदास भी धराशायी हो जाते। पण्डितों ने इनकी कार्यवाही को देखा और इन्हें महामूर्ख समझकर इन्हें नीचे उतरवाकर 'हमलोग तुम्हारा विवाह एक परम सुन्दरी राजकुमारी से