भारतकोश
मेघदूतम् (वैद्यनाथ झा शास्त्री हिन्दी टीका सहित)

मेघदूतम् (वैद्यनाथ झा शास्त्री हिन्दी टीका सहित)

Meghadutam of Kalidasa Hindi

महाकवि कालिदास द्वारा

स्रोत: Meghadutam with Sanskrit text and Hindi Commentary by Pt. Vaidyanath Jha Shastri (उद्गम)

DevanagariHindipublished335 पृष्ठ

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६०मेघदूतम्

केतकी के पुष्पों से, पाण्डुच्छायोपवनवृतयः = जहाँ के उद्यान का घेराव पीला-पीला-सा हो गया। गृहबलिभुजाम् = घर की (विश्वेदेव) बलि को खाने वाले (कौए आदि) पक्षियों के, नीडारम्भैः = घोसलों की रचना से, आकुलग्रामचैत्याः = सङ्कीर्ण हो गये हैं पीपल आदि वृक्ष जहां के गाँवों के, परिणतफलश्यामजम्बूवनान्ताः = जहाँ के जामुन के वन पके हुए फलों से काले हो गये हैं, कतिपयदिनस्थायिहंसाः = जहाँ हंस कुछ दिनों तक रह सकते हैं ऐसे, सम्पत्स्यन्ते = हो जायेंगे।

भावार्थः—हे मेघ ! त्वयि समीपस्थे सति दशार्णदेशे गृहाऽऽरामाणां वृत्तयः किञ्चिद्विकसितकेतकी-कुसमानांकान्त्या पीताभा भविष्यन्ति, ग्राम्याः अश्वत्थादयो वृक्षाः बल्यन्नभोजीनां काकादीनां कुलाय-निर्माणैः सङ्कीर्णा भविष्यन्ति। तत्रस्थवनप्रान्तभागाः पक्वजम्बूफलैः कृष्णाः भविष्यन्ति, हंसाश्च कतिपयदिextदिवसं यावत् स्थास्यन्ति।

हिन्दी—हे मेघ ! तुम्हारे समीप आने पर दशार्णदेश के बगीचों का घेराव अधखिले केतकी पुष्प के रंग से पीला हो जायेगा, घर में दी गयी बलि को खाने वाले कौए आदि पक्षियों द्वारा घोंसलों के निर्माण से वहाँ के गाँवों के पीपल आदि वृक्ष सङ्कीर्ण हो जायेंगे, पके हुए फलों की आभा से वहाँ के जामुन के वन-प्रदेश काले हो जायेंगे, हंस भी वहाँ वर्षाऋतु के कारण कुछ दिन ही ठहरेंगे।

समासः—पाण्ड्वी छाया यासां ताः पाण्डुच्छायाः (बहु०)। पाण्डुच्छायाः उपवनानां वृतयः येषु ते = पाण्डुच्छायोपवनवृतयः (बहुव्री०)। आकुलानि ग्रामेषु चैत्यानि येषु ते = आकुलग्रामचैत्याः (बहुव्रीहि०)। परिणतैः फलैः श्यामानि यानि जम्बूवनानि (बहुव्रीहिः) ते अन्ताः—परिणतफलश्यामजम्बूवनान्ता (तृ० तत्०)। कतिपयेषु दिनेषु स्थायिनो हंसा येषु ते—कतिपयदिनस्थायिहंसाः (बहुव्रीहि०)। सूचीषु भिन्नानि सूचिभिन्नानि (स० तत्०) तैः। नीडानामारम्भः नीडारम्भः (ष० तत्०) तैः। गृहाणां बलयः (ष० तत्०) गृहबलीन् भुञ्जत् इति गृहबलिभुजः तेषाम्।