भारतकोश
मृच्छकटिकम् (सटीक संस्कृत नाटक)

मृच्छकटिकम् (सटीक संस्कृत नाटक)

Mricchakatikam with Sanskrit-Hindi Commentary

महाराज शूद्रक / पं. जयशंकर लाल त्रिपाठी द्वारा

DevanagariSanskritpublished760 पृष्ठ

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प्रथमोऽङ्कः १०६

**विदूषकः—**उववेसिदा ज्जेव अम्हे । ( उपवेशिता एव वयम् । )
**शकारः—**केण ? । ( केन ? । )
**विदूषकः—**कअन्तेण । ( कृतान्तेन । )
**शकारः—**उट्ठेहि उट्ठेहि । ( उत्तिष्ठ उत्तिष्ठ । )
**विदूषकः—**उट्ठिस्सामो । ( उत्थास्यामः । )
**शकारः—**कदा ? ( कदा ? )
**विदूषकः—**जदा पुणो वि देव्वं अणुऊलं भविस्सदि । (यदा पुनरपि दैवमनुकूलं भविष्यति । )
**शकारः—**अले ! लोद लोद । ( अरे ! रुदिहि रुदिहि । )
**विदूषकः—**रोदाविदा ज्जेव अम्हे । ( रोदिता एव वयम् । )
**शकारः—**केण ? ( केन ? )
**विदूषकः—**दुग्गदीए । ( दुर्गत्या । )
**शकारः—**अले ! हश हश । ( अरे ! हस हस । )
**विदूषकः—**हसिस्सामो । ( हसिष्यामः । )
**शकारः—**कदा ? ( कदा ? । )


उद्देश्य करके ) अरे कौआ के पैर के समान शिर तथा मस्तक वाले दुष्ट वटुक ! ( ब्राह्मण के बच्चे ! ) बैठ जा, बैठ जा ।

**विदूषक—**हम लोग तो बैठा ही दिये गये हैं ।
**शकार—**किसके द्वारा ?
**विदूषक—**भाग्य ( दैव ) के द्वारा ।
**शकार—**उठो, उठो ।
**विदूषक—**उठेंगे ।
**शकार—**कब ?
**विदूषक—**जब फिर भाग्य अनुकूल होगा ।
**शकार—**अरे ! रोओ, रोओ ।
**विदूषक—**हम लोग तो रुलाये ही जा चुके हैं ।
**शकार—**किसके द्वारा ?
**विदूषक—**दुर्गति ( दरिद्रता ) के द्वारा ।
**शकार—**अरे ! हँस, हँस ।
**विदूषक—**हसेंगे ।
**शकार—**कब ?

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