भारतकोश
मृच्छकटिकम् (सटीक संस्कृत नाटक)

मृच्छकटिकम् (सटीक संस्कृत नाटक)

Mricchakatikam with Sanskrit-Hindi Commentary

महाराज शूद्रक / पं. जयशंकर लाल त्रिपाठी द्वारा

DevanagariSanskritpublished760 पृष्ठ

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१३६ | मृच्छकटिकम्

णव-बन्धण-मुक्काए विअ गद्दहीए हा ! ताडिदोम्हि गद्दहीए । अङ्गलाअमुक्काए विअ शत्तीए घडुक्को विअ घादिदोम्हि शत्तीए ॥१॥ ( नव-बन्धन-मुक्तयेव गर्दभ्या हा ताडितोऽस्मि गर्दभ्या । अङ्गराज-मुक्तयेव शक्त्या घटोत्कच इव घातितोऽस्मि शक्त्या ॥ १ ॥ )


अन्वयः—हा ! नवबन्धनमुक्तया, गर्दभ्या, इव, गर्दभ्या, ताडितः, अस्मि, अङ्गराजमुक्तया, शक्त्या, घटोत्कचः, इव, शक्त्या, ( अहम् ) घातितः, अस्मि ॥ १ ॥

शब्दार्थः—हा=हाय ? नवबन्धनमुक्तया=पहली बार बनाये गये बन्धन से छूटी हुई, ( खुलकर भागती हुई ), गर्दभ्या इव=गधी के समान, गर्दभ्या=जुआ खेलने की कौड़ी के द्वारा, ताडितः=मारा गया हूँ, अङ्गराजमुक्तया = कर्ण के द्वारा चलायी गयी ( छोड़ी गयी ), शक्त्या = शक्तिनामक अस्त्रविशेष के द्वारा, घटोत्कचः=भीमसेन एवं हिडिम्बा के पुत्र घटोत्कच के, इव=समान, शक्त्या=ज्यूय की कौड़ी की एक विशेष चाल के द्वारा, ( अहम्=मैं संवाहक ), घातितः=मारा गया, अस्मि=हूँ ॥ १ ॥

( बिना पर्दा उठाये घबराये हुये प्रवेश करके )

अर्थसंवाहक—आश्चर्य ? जुआरीपन बड़ा ही कष्टदायक है—हाय ! सबसे पहले लगाये गये बंधन ( रस्सी ) आदि से छूटी हुई ( भागती हुई ) गधी के समान गर्दभी ( जुये में प्रयुक्त होने वाली कौड़ी अथवा पाशा ) के द्वारा मैं मार दिया गया हूँ ( हरा दिया गया हूँ )। अङ्गराज कर्ण के द्वारा चलायी ( छोड़ी ) गई शक्ति ( नामक अस्त्र ) के द्वारा घटोत्कच के समान ( मैं ) शक्ति ( जुये की कौड़ियों की एक विशेष चाल ) से मार दिया गया हूँ, ( मरणतुल्य हार हो गयी है ) ॥ १ ॥

टीकाहा=कष्टम्, नवबन्धनमुक्तया=नवम्=प्रथमम्, यत् बन्धनम्, रज्ज्वादिनां धारणम्, तस्मात् मुक्तया=स्वतन्त्रया, गर्दभ्या=रासभ्या, इव=तुल्यम्, गर्दभ्या=वराटिकया, ताडितः=दण्डितः, पराजितः,, अस्मि, अङ्गराजमुक्तया=कर्णेन प्रक्षिप्तया, शक्त्या=तन्नामकास्त्रविशेषेण, घटोत्कचः=हिडिम्बाभीमयोः पुत्रः, इव=यथा, शक्त्या=द्यूतक्रीडासम्बन्धिवेलनविशेषेण, (अहम्=संवाहकः ) घातितः=मारितः, अस्मि=भवामि, अत्र इव-शब्दद्वयप्रयोगात् उपमाद्वयम्, यमकद्वयञ्च । चित्रजातिः वृत्तम् ॥ १ ॥

विमर्श—नवबन्धन-मुक्तया—उच्छृङ्खल गधी जब पहली बार रस्सी आदि से बांधी जाती है और उसे तोड़कर या खुल जाने पर जैसे अनवरत दुलत्ती चला चलाकर लोगों को मारा करती है उसी प्रकार गर्दभी=वरांटिका=कौड़ी ने संवाहक को पीट डाला । घटोत्कचः इव—भीमसेन एवं हिडिम्बा राक्षसी का पुत्र घटोत्कच था । वह महाभारत के युद्ध में कौरवों का प्रचुर संहार करने लगा था । तब एक व्यक्ति का निश्चित वध कर डालने वाली शक्ति को कर्ण