मृच्छकटिकम् (सटीक संस्कृत नाटक)
Mricchakatikam with Sanskrit-Hindi Commentary
महाराज शूद्रक / पं. जयशंकर लाल त्रिपाठी द्वारा
पृष्ठ 237, कुल 760 में से
संदर्भ में पढ़ेंद्वितीयोऽङ्कः १४७
अपि च—
द्रव्यं लब्धं द्यूतेनैव दारा मित्रं द्यूतेनैव ।
दत्तं भुक्तं द्यूतेनैव सर्वं नष्टं द्यूतेनैव ॥ ८ ॥
अपि च—
त्रेता-हृतसर्वस्वः पावर-पतनाच्च शोषितशरीरः ।
नर्दित-दर्शितमार्गः कटेन विनिपातितो यामि ॥ ९ ॥
छल प्रपञ्च दिखाने वाला द्यूत और राजा । इसमें उपमा अलंकार और पुष्पिताग्रा छन्द है। लक्षण
'अयुजि न युगरेफतो यकारो युजि च नजौ जरगाश्च पुष्पिताग्रा' ॥ ७ ॥
**अन्वयः—**द्यूतेन, एव, द्रव्यम्, लब्धम्, दाराः, मित्रम्, च, द्यूतेन, एव, दत्तम्, भुक्तम्, द्यूतेन एव, सर्वम्, नष्टम् ॥ ८ ॥
**शब्दार्थः—**द्यूतेन = जुआ के द्वारा, एव = ही, द्रव्यम् = धन, लब्धम् = मिला, द्यूतेन एव = जुआ के द्वारा ही, दाराः = स्त्रियाँ, मिलीं, मित्रम् = मित्र, मिला, द्यूतेन एव = जुआ के द्वारा ही, दत्तम् = दिया गया, भुक्तम् = भोग किया गया, द्यूतेन एव = जुआ के द्वारा ही, सर्वम् = सब कुछ, नष्टम् = नष्ट हो गया ॥ ८ ॥
**अर्थ—**और भी,
(मैंने) जुआ से ही धन पाया, जुआ से ही स्त्री (मिली), मित्र मिला, जुआ ने ही (सब कुछ) दिया, भोग किया और जुआ से ही सब कुछ नष्ट हो गया ॥ ८ ॥
**टीका—**मया कर्त्रा, द्यूतेन एव = करणभूतेन द्यूतेन, द्रव्यम् = धनम्, लब्धम् = प्राप्तम्, द्यूतेन एव, दाराः = स्त्रियः, स्त्री वा, लब्धा, मित्रम् = सुहृद्, लब्धम्, द्यूतेनैव कर्त्रा, दत्तम् = प्रदत्तम्, द्यूतेनैव = हेतुना, करणेन वा, सर्वम् = निखिलम्, नष्टम् = विनष्टम् । अत्रैकस्यैव कारकस्यानेक-क्रिया-सम्बन्धात् कारकदीपकमलङ्कारः, विद्युन्मालावृत्तम् ॥ ८ ॥
**विमर्शः—**दर्दुरक यहाँ यह कहता है कि मुझे जो कुछ मिला या खोया वह सब द्यूत के कारण ही हुआ । द्यूतरूपी एक ही कारक का अनेक क्रियाओं के साथ सम्बन्ध होने से कारकदीपक अलंकार है। कुछ ने विषमालंकार माना है। विद्युन्माला छन्द है। लक्षण—मो मो गो गो विद्युन्माला ॥ ८ ॥
**अन्वयः—**त्रेताहृतसर्वस्वः, पावरपतनात्, च, शोषितशरीरः, नर्दितदर्शित-मार्गः, कटेन, विनिपातितः, यामि ॥ ९ ॥
**शब्दार्थ—**त्रेताहृत-सर्वस्वः = त्रेता (तीया नामक एक खास चाल) से सर्वस्व हार जाने वाला, च = और, पावर-पतनात् = पावर = दूआ नामक खेल की चाल गिरने से, शोषित-शरीरः = सूखे निश्चेष्ट शरीर वाला, नर्दित-दर्शित-मार्गः = नर्दित = नडका