भारतकोश
मृच्छकटिकम् (सटीक संस्कृत नाटक)

मृच्छकटिकम् (सटीक संस्कृत नाटक)

Mricchakatikam with Sanskrit-Hindi Commentary

महाराज शूद्रक / पं. जयशंकर लाल त्रिपाठी द्वारा

DevanagariSanskritpublished760 पृष्ठ

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चतुर्थोऽङ्कः २४७

मदनिका-- ( समाश्वस्य ) साहसिअ ! ण क्खु तुए मम कारणादो इमं अकज्जं करन्तेण, तस्सिं गेहे कोवि बावादिदो परिक्खदो वा ? ( साहसिक ! न खलु त्वया मम कारणादिदमकार्यं कुर्वता तस्मिन् गेहे कोऽपि व्यापादितः परिक्षतो वा ? ) ।

शर्विलकः-- मदनिके ! भीते सुप्ते न शर्विलकः प्रहरति; तन्मया न कश्चिद् व्यापादितो नापि परिक्षतः ।

मदनिका-- सच्चं ( सत्यम् ? )


शब्दार्थ-- अभुजिष्यात्वम् = स्वतन्त्रता को, नीयमाना = प्राप्त कराई जाती हुई, ( अपि = भी ) तुम, विषादस्रस्तसर्वाङ्गी = अतिशय दुःख से शिथिल अङ्गोंवाली, सम्भ्रमभ्रान्तलोचना = भय से चकित नेत्रोंवाली, कम्पसे = काँप रही हो, [ माम् = मुझ शर्विलक पर ] न = नहीं, अनुकम्पसे = अनुग्रह कर रही हो ? ॥ ८ ॥

अर्थ-- शर्विलक-- मदनिके ! धैर्य धारण करो । तुम इस समय किसलिये — स्वतन्त्र करायी जाती हुई भी, विषाद से शिथिल अवयवों वाली, भय से चकित नेत्रोंवाली, काँप रही हो, मुझ पर अनुकम्पा नहीं कर रहीं हो ? ॥ ८ ॥

टीका-- चारुदत्त-नाम-श्रवणमात्रेण त्रस्तां कम्पितां च मदनिकां विलोक्य तां सान्त्वयन्नाह — विषादेति । अभुजिष्यात्वम् = अदासीत्वम्, स्वाधीनतामिति भावः, नीयमाना = चौर्येणापि धनं नीत्वा प्राप्यमाणापि, त्वम्, विषादेन = दुःखातिरेकेण, स्रस्तम् = पतितम् शिथिलम्, सर्वम् = सकलम्, अङ्गम् = अवयवः यस्याः सा तादृशी, सम्भ्रमेण = भयेन, भ्रान्ते = घूर्णिते चकिते वा, लोचने = नेत्रे यस्याः सा तादृशी, सती, कम्पसे = वेपसे, माम् शर्विलकम्, न = नैव, अनुकम्पसे = अनुगृह्णासि, दयसे । एवञ्च विशेषोक्तिरलङ्कारः, पथ्यावक्त्रं वृत्तम् ॥ ८ ॥

विमर्श-- यहाँ काँपने का कारण न होने पर भी काँपना हो रहा है अतः विभावना अलङ्कार है । और अभुजिष्यात्व को प्राप्त कराना रूपी अनुकम्पाहेतु के रहने पर भी अनुकम्पा नहीं हो रही है । अतः विशेषोक्ति अलङ्कार भी है । अनुकम्पसे — अनु + √कम्प + लट् मध्यम पु० ए. व. । पथ्यावक्त्र छन्द है ॥ ८ ॥

अर्थ --मदनिका-- ( धैर्य धारण करके ) अरे दुःसाहसी ! मेरे कारण इस अनुचित कार्य [ चोरी ] को करते समय तुमने उस घर में किसी को मारा अथवा घायल तो नहीं किया है ?

शर्विलक-- भयभीत [ या ] सोये हुये व्यक्ति पर शर्विलक प्रहार नहीं करता है; अतः मैंने न तो किसी का वध किया और न घायल किया ।

मदनिका --सच ?