भारतकोश
मृच्छकटिकम् (सटीक संस्कृत नाटक)

मृच्छकटिकम् (सटीक संस्कृत नाटक)

Mricchakatikam with Sanskrit-Hindi Commentary

महाराज शूद्रक / पं. जयशंकर लाल त्रिपाठी द्वारा

DevanagariSanskritpublished760 पृष्ठ

पृष्ठ 347, कुल 760 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 347

२६० मृच्छकटिकम्

तथापि नीतिविरुद्धमेतत् । अन्य उपायश्चिन्त्यताम् । मदनिका—सो अअ अवरो उवाओ । ( सोऽयमपर उपायः । ) वसन्तसेना—को क्खु अवरो उवाओ भविस्सदि ? (कः खलु अपरं उपायो भविष्यति ? )


कर्म=निन्दित चोरी का कार्य ही, वा=निश्चित रूप से, मम=मुझ शर्विलक की, लज्जाम्=लाज को, जनयति=उत्पन्न कर रहा है । ( अर्थात् चोरी करने से ही मुझे लज्जा हो रही है । ) इह=इस विषय में, नृपतिः=राजा, मादृशाम्=हमारे जैसे, शठानाम्=धूतों का, किम् नु=क्या, कुर्यात्=कर सकेगा ? ॥ २० ॥

अर्थ—शर्विलक—मदनिके !

इस दुस्साहसिक ( चोरी के ) कार्य में, सचमुच, न तो किसी प्रकार का खेद ( पश्चात्ताप ) है और न ( राजा के दण्ड का ) भय है । इस स्थिति में तुम उन सज्जन चारुदत्त के गुणों का वर्णन क्यों कर रही हो ? क्योंकि यह चोरी करना कुत्सित कार्य ही मेरी लज्जा उत्पन्न कर रहा है। इस विषय में मेरे जैसे धूर्तों का राजा क्या कर सकता है ? अर्थात् कुछ नहीं कर सकता है ॥ २० ॥

टीका-—आत्मनः सामर्थ्यं प्रकटयन् मदनिकायाः, वचनं नीतिविरुद्धं प्रतिपाद- यन्नाह--न खल्विति । अस्मिन्=उपस्थिते, साहसे=चौर्यरूपे साहसिकर्मणि, मम=शर्विलकस्य, विषादः = खेदः, पश्चात्तापो वा, न खलु = नैवास्ति, त्वम्=मदनिका, साधोः = सज्जनस्य, तस्य = चारुदत्तस्य, गुणान् = दयादाक्षिण्यादीन्, किमर्थम्=किन्निमित्तम्, कथयसि=वर्णयसि ? हि=अवधारणे, वा=अथवा, इदम्=मयाचरितम्, इदम्, कुत्सितम्=निन्दितम्, कर्म = चौर्यम्, मम=शर्विलकस्य, लज्जाम्=ह्रियम्, जनयति = उत्पादयति, इह = अस्मिन् विषये, नगरे वा, नृपतिः = राजा, मादृशाम्=मादृशानाम्, शठानाम्=धूर्तानाम्, किम् नु, कुर्यात्=किं कतुं शक्नुयात्, न किमपीत्यर्थः । काव्यलिङ्गमलंकारः, मालिनी वृत्तम् ॥ २० ॥

विमर्श—साहसे—सहसा = बलेन, अविचारेण वा कृतम्-साहसम् = चौर्या- दिकम्, तत्र । विषादः=खेद, पश्चात्ताप । इह=इस नगर में, इस विषय में । यहाँ काव्यलिङ्ग अलंकार और मालिनी छन्द है ॥ २० ॥

**अर्थ—**फिर भी यह [ चोरों की ] नीति [ सिद्धान्त ] के विरुद्ध है । कोई दूसरा उपाय सोंचो ।

**मदनिका—**तो फिर यह दूसरा उपाय है ।

**वसन्तसेना—**दूसरा उपाय क्या होगा ?