भारतकोश
मृच्छकटिकम् (सटीक संस्कृत नाटक)

मृच्छकटिकम् (सटीक संस्कृत नाटक)

Mricchakatikam with Sanskrit-Hindi Commentary

महाराज शूद्रक / पं. जयशंकर लाल त्रिपाठी द्वारा

DevanagariSanskritpublished760 पृष्ठ

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भूमिका २५

उसकी नवपत्नी होने पर भी बाधक नहीं बनती है। अतः शर्विलक गाड़ीवान को समझाकर चेट के साथ मदनिका को सार्थवाह रेभिल के घर भेज देता है और स्वयं अपने मित्र को छुड़ाने के लिये चल पड़ता है।

चतुर्थ अंक के चौथे दृश्य में एक चेटी वसन्तसेना को यह समाचार देती है कि चारुदत्त के पास से एक ब्राह्मण आया है। यह सुनकर प्रसन्न होकर वसन्तसेना उसे शीघ्र ही भीतर लाने की अनुमति दे देती है। चेटी विदूषक को लेकर वसन्तसेना के पास जाती है। मार्ग में आठ प्रकोष्ठों को देखकर उनकी महिमा कहता हुआ विदूषक प्रसन्न होता है। वसन्तसेना के पास पहुँचकर विदूषक यह कहता है कि आपके गहने अपने मानकर आर्य चारुदत्त जुये में हार गये हैं। अतः उनके बदले में यह रत्नमाला भेजी है, आप इसे ले लीजिये। वसन्तसेना रत्नमाला लेकर विदूषक को वापस भेजती है और सायंकाल चारुदत्त से मिलने का सन्देश देती है। रत्नमाला ले लेने से विदूषक नाराज होकर चला जाता है। वसन्तसेना भी चारुदत्त से मिलने के लिये चल पड़ती है।

पञ्चम अङ्क

पंचम अंक के प्रथम दृश्य में उत्कण्ठित चारुदत्त के पास आकर विदूषक उससे कहता है कि वसन्तसेना ने रत्नावली स्वीकार कर ली है और सायंकाल उससे मिलने के लिये आने वाली है। वसन्तसेना द्वारा उसका अपेक्षित सम्मान न होने से और बहुमूल्य रत्नावली स्वीकार कर लेने के कारण विदूषक उस वेश्या से सम्पर्क समाप्त करने पर जोर देता है।

पंचम अंक के द्वितीय दृश्य में चेट आकर वसन्तसेना के आगमन की खबर देता है। यह जानकर चारुदत्त बहुत खुश हो जाता है।

पंचम अंक के तृतीय दृश्य में विट के साथ वसन्तसेना चारुदत्त के घर की ओर जाती हुई दिखाई देती है। वे दोनों वर्षा का सुन्दर वर्णन करते हैं। वसन्तसेना वर्षा और बिजली दोनों को बाधा पहुँचाने के कारण कोसती है। चारुदत्त के घर पहुँच कर विट इशारे से विदूषक को बुलाता है और वसन्तसेना के आगमन की सूचना देता है। विदूषक यह शुभ समाचार चारुदत्त को बताता है। वह सुनकर बहुत प्रसन्न हो जाता है। वसन्तसेना चारुदत्त के पास जाते समय छत्रधारिणी के साथ विट को वापस भेज देती है।

चतुर्थ दृश्य में चेटी और वसन्तसेना वाटिका में पहुंचते हैं। वहाँ चारुदत्त प्रसन्न होकर उसका स्वागत करता है। विदूषक वसन्तसेना से उसके आगमन का कारण पूछता है। चेटी उत्तर देती है कि आपकी भेजी हुई रत्नावली का मूल्य क्या है ?