मृच्छकटिकम् (सटीक संस्कृत नाटक)
Mricchakatikam with Sanskrit-Hindi Commentary
महाराज शूद्रक / पं. जयशंकर लाल त्रिपाठी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२८ मृच्छकटिक
चढ़कर देखता है। उसमें बैठे हुये सुन्दर रूप वाले उसको हथकड़ी और बेड़ियों से बंधा देखकर उसका परिचय पूछता है। वह अपना परिचय देकर राजा द्वारा कारागार में बन्द करने की बात कहता है। वहां से भागने की बात सुनकर चारुदत्त उसे अभयदान देता है। और हथकड़ी बेड़ियों से मुक्त करा कर उसे शीघ्र ही अपनी गाड़ी से घर जाने के लिये कहता है। आर्यक के चले जाने पर राजा पालक के भय से चारुदत्त और विदूषक भी हथकड़ी-बेड़ियाँ अंधे कुआँ में फिकवाकर चल देते हैं।
अष्टम अङ्क—
अष्टम अंक के प्रथम दृश्य में गीले चीवर को लिये हुये एक बौद्ध भिक्षु प्रवेश करता है। वह धर्म का उपदेश देता है। उसी समय विट और शकार भी वहीं बगीचे में आ जाते हैं। शकार भिक्षु को डांटता है। और जन्म लेते ही संन्यासी न बनने का आरोप लगाकर पीटता है। किन्तु विट उसे बचाता है। वह भिक्षु चला जाता है। शकार बैठकर वसन्तसेना को याद करने लगता है। वह अपनी गाड़ी की प्रतीक्षा करता है। दोपहर का समय है। वह भूख से व्याकुल है। समय बिताने के लिये वह गाना गाने लगता है।
द्वितीय दृश्य में गाड़ी लिये हुये स्थावरक चेट दिखाई देता है। गाड़ी की आवाज सुनकर शकार गाड़ी आने की कल्पना करने लगता है। तभी चेट आकर गाड़ी ले आने की सूचना देता है। शकार गाड़ी को चहारदीवारी से लंघवा कर ही लाने की जिद करता है। गाड़ी आ जाने पर शकार उस पर चढ़कर भीतर बैठी हुई वसन्तसेना को देखकर घबड़ा जाता है और विट को पकड़ लेता है। बाद में विट गाड़ी पर चढ़कर उसमें बैठी हुई वसन्तसेना को देखता है। वह उससे अपनी रक्षा की प्रार्थना करती है। विट उसे सान्त्वना देता है। वह गाड़ी से नीचे उतर कर शकार से कहता है कि गाड़ी में सचमुच राक्षसी बैठी है। अतः वह शकार से पैदल ही चलने को कहता है। किन्तु वह गाड़ी से ही जाने का आग्रह करता है। तब विट बता देता है कि गाड़ी में सचमुच वसन्तसेना बैठी है। वह तुम्हारे साथ अभिसार के लिये आई है। यह सुनकर प्रसन्न होकर शकार वसन्तसेना के पैरों पर गिर जाता है। और अपनी गलतियों के लिये क्षमा मांगने लगता है। किन्तु वसन्तसेना उसे स्वीकार करने के स्थान पर पैर से मार देती है। इससे शकार क्रुद्ध हो जाता है। वह चेट से पूछता है कि उसे वसन्तसेना कहाँ से मिली? चेट गाड़ी बदल जाने की बात कहता है। शकार वसन्तसेना से उसी समय गाड़ी से उतरने को कहता है। फिर उसे उतार देता है। शकार विट को प्रलोभन देकर वसन्तसेना