मृच्छकटिकम् (सटीक संस्कृत नाटक)
Mricchakatikam with Sanskrit-Hindi Commentary
महाराज शूद्रक / पं. जयशंकर लाल त्रिपाठी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंभूमिका २९
को मारने की बात कहता है किन्तु विट वैसा करने से इनकार कर देता है। इसके बाद शकार चेट से वसन्तसेना को मारने के लिये कहता है और अनेक प्रलोभन देता है। तब भी चेट परलोक के भय से वसन्तसेना को मारने से इनकार कर देता है। शकार क्रुद्ध होकर उसे पीटने लगता है। फिर चेट से एकान्त में जाकर बैठने की बात कहता है। वह चला जाता है। तब शकार स्वयं ही वसन्तसेना को मारने के लिये तैयार होता है किन्तु विट उसका गला पकड़ कर गिरा देता है। शकार एक चालबाजी करता है। वह विट से कहता है कि तुम्हारे सामने वसन्तसेना मुझे चाहने में लजा रही है। अतः तुम भी जाओ और चेट को पकड़ कर लाओ। विट शकार की बात पर विश्वास कर लेता है। वह वसन्तसेना को धरोहर के रूप में शकार को सौंप कर चला जाता है। शकार वसन्तसेना को फिर से खुश करने की कोशिश करता है। किन्तु वह हर हालत में चारुदत्त की ही प्रशंसा करती रहती है। तब क्रुद्ध होकर शकार उसका गला दबा देता है। वसन्तसेना मूच्छित होकर गिर जाती है। शकार अपने पराक्रम पर बहुत खुश होता है। वह अपने को छिपाकर बैठ जाता है।
तृतीय दृश्य में चेट के साथ विट पुनः प्रवेश करता है। वह शकार से अपनी धरोहर वसन्तसेना को वापस माँगता है। शकार कहता है कि वह तुम्हारे पीछे-पीछे ही चली गयी थी। बाद में वह कहता है कि उसने वसन्तसेना को मार दिया है। ऐसा कहकर मरी पड़ी हुयी वसन्तसेना को दिखाता है। विट दुखी होकर विलाप करने लगता है। चेट उसे समझाता है। उसे यह भय हो जाता है कि शकार उस हत्या का आरोप उस पर न लगा दे। अतः वह वहाँ से चला जाता है। शकार चेट को पकड़ कर अपने घर में बन्दी बना देता है और जाने से पहले सूखे पत्तों से वसन्तसेना को ढंक देता है। इसके बाद में चारुदत्त पर हत्या का आरोप लगाने के लिये न्यायालय जाने की कहकर निकल जाता है।
चतुर्थ दृश्य में शकार के जाते समय ही एक बौद्ध भिक्षु प्रवेश करता है। वह अपने गीले चीवरखण्ड को सुखाने के लिये उपयुक्त स्थान खोजता है। इसी बीच उसे पत्तों के बीच में किसी के साँस लेने का पता लगता है। उधर कुछ होश में आकर वसन्तसेना अपना हाथ दिखलाती है। भिक्षु पत्ते हटाकर देखता है कि वही बुद्धो-पासिका है जिसने उसे जुआरियों के ऋण से मुक्त कराया था। उसका दूसरा भी हाथ देखकर उसे पूर्ण विश्वास हो जाता है। वसन्तसेना पानी माँगती है। वह अपना चीवर निचोड़ कर उसको पानी दे देता है और अपने कपड़े से हवा करने लगता है। वसन्तसेना द्वारा पूछे जाने पर वह पहले ऋणमुक्त कराये जाने की सारी