भारतकोश
मृच्छकटिकम् (सटीक संस्कृत नाटक)

मृच्छकटिकम् (सटीक संस्कृत नाटक)

Mricchakatikam with Sanskrit-Hindi Commentary

महाराज शूद्रक / पं. जयशंकर लाल त्रिपाठी द्वारा

DevanagariSanskritpublished760 पृष्ठ

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३० मृच्छकटिक

बात बता कर अपना परिचय देता है। वह पास की लता झुकाकर उसके सहारे से उठने के लिये कहता है और वहीं पास में एक बौद्ध विहार में अपनी धर्मभगिनी के पास चलने के लिये कहता है। ऐसा कहकर साथ में लेकर आश्रम की ओर चल देता है।

नवम अङ्क—

नवम अङ्क के प्रथम दृश्य में शोधनक (सफाई कर्मचारी) प्रवेश करके न्यायालय की सफाई तथा कुर्सी लगाने आदि की व्यवस्था की सूचना देता है। इसी बीच उज्ज्वलवेश धारण किये हुये शकार प्रवेश करता है। वह वसन्तसेना के हत्यारूपी अपने पाप को चारुदत्त के शिर पर मढ़ देने की बात करता है। वह न्यायाधिकारियों की प्रतीक्षा करने लगता है। उसी समय श्रेष्ठी तथा कायस्थ आदि से घिरे हुये न्यायाधीश का प्रवेश होता है। न्यायाधीश सही न्याय करने की दुष्करता बताता है। न्यायाधिकरणिक के आदेश से शोधनक प्रार्थियों को अपना मुकदमा प्रस्तुत करने के लिये सूचित करता है। सबसे पहले शकार अपना मुकदमा प्रस्तुत करना चाहता है। किन्तु पहले अस्वीकार करके पुनः इस दुष्ट के भय से इसका मुकदमा प्रस्तुत करने के लिये आदेश कर दिया जाता है। वह अपनी सफलता पर गर्व करने लगता है। वह न्यायालय में आकर कहता है कि उसने अपने पुष्पकरण्डक जीर्णोद्यान में एक मरी हुई स्त्री का शरीर देखा है। वह स्त्री वसन्तसेना है। वह कहता है कि किसी ने धन के लोभ से वसन्तसेना का गला दबाकर मार डाला है। वसन्तसेना किसके पास गयी थी—यह जानने के लिये न्यायाधिकारी पहले उसकी माता को बुलाते हैं। उसकी माता आकर बताती है कि उसकी बेटी अपने मित्र चारुदत्त के घर पर अभिसार के लिये गयी है। यह सुनकर न्यायाधिकारी चारुदत्त को भी बुलाते हैं। न्यायालय के कर्मचारी के साथ आते हुये चारुदत्त को मार्ग में अनेक अपशकुन दिखाई देते हैं जिनसे वह घबड़ा जाता है। न्यायालय में पूछे जाने पर वह बता देता है कि वसन्तसेना के साथ उसका प्रेमव्यवहार है। वह बताता है कि वसन्तसेना अपने घर गयी है। किन्तु वह यह नहीं बता पाता कि गाड़ी से गयी है या पैदल। इसी बीच अपमानित होने से क्रुद्ध वीरक न्यायालय में आता है। वह अपने कर्तव्यपालन के समय चन्दनक द्वारा किये गये अपमान की बात कहता है। वह यह भी कहता है कि चारुदत्त की गाड़ी में बैठी हुई वसन्तसेना पुष्पकरण्डक जीर्णोद्यान की ओर जा रही थी। वीरक की बात सुनकर न्यायाधिकारी पुष्पकरण्डक उद्यान में यह पता लगाने के लिये वीरक को भेजते हैं कि वहाँ कोई स्त्री मरी पड़ी है अथवा नहीं।