भारतकोश
मृच्छकटिकम् (सटीक संस्कृत नाटक)

मृच्छकटिकम् (सटीक संस्कृत नाटक)

Mricchakatikam with Sanskrit-Hindi Commentary

महाराज शूद्रक / पं. जयशंकर लाल त्रिपाठी द्वारा

DevanagariSanskritpublished760 पृष्ठ

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३४ मृच्छकटिक

को अनुगृहीत मानती है। भिक्षु को सभी विहारों का कुलपति बना दिया जाता है। स्थावरक को शकार की दासता से मुक्त करा कर स्वतन्त्र नागरिक बना दिया जाता है। दोनों चाण्डालों को सभी चाण्डालों का प्रधान बना दिया जाता है। चन्दनक को 'पृथ्वीदण्डपालक' का पद दे दिया जाता है। शकार को उसी प्रकार स्वच्छन्द विचरण करने के लिए छोड़ दिया जाता है।

भारत-वाक्य के साथ नाटक (प्रकरण) का दशम अङ्क समाप्त हो जाता है।

पात्रों का चरित्र-चित्रण

मृच्छकटिक एक जीते जागते पात्रों का सजीव चित्रण है। प्रायः प्रत्येक पात्र अपनी कुछ विशेषताओं के साथ दिखाई देता है। वह सामाजिक को भली-भाँति प्रभावित करने में पूर्णतया सफल है। इसमें पुरुष पात्रों में चारुदत्त, शकार, शर्विलक और विदूषक के अतिरिक्त विट, चेट, भिक्षुक तथा आर्यक आदि प्रधान हैं। स्त्रीपात्रों में वसन्तसेना, धूता, मदनिका तथा रदनिका प्रधान हैं। इन पात्रों की चरित्र-सम्बन्धी विशेषताओं का विवेचन यहाँ किया जा रहा है।

चारुदत्त

मृच्छकटिक में चारुदत्त को सुन्दर, युवक, परोपकारी, गुणग्राही, उदार, भावुक, पवित्रप्रेमी, सत्यवक्ता, शरणागतवत्सल, परम क्षमाशील आदि रूपों में चित्रित किया गया है। यह इस 'प्रकरण' का धीरप्रशान्त नायक है।

(१) व्यक्तित्व

उज्जयिनी नगरी के अति सम्पन्न वंश में चारुदत्त ने जन्म लिया है। उसके वंशज यद्यपि ब्राह्मण थे तथापि व्यापार के माध्यम से उन्होंने प्रचुर सम्पत्ति अर्जित की थी। अतः वे धनिकों में प्रतिष्ठित थे। परन्तु चारुदत्त एक निर्लोभ और अतिशय उदारवृत्ति का है। वह किसी को निराश नहीं करना चाहता। अतः दान देना उसका स्वाभाविक गुण बन गया है। उसका व्यक्तित्व आकर्षक है। वह जितना गुणी है उतना ही सुन्दर। द्वितीय अङ्क में संवाहक वसन्तसेना को जब चारुदत्त का परिचय देता है तो वह कहता है "यस्तादृशः प्रियदर्शनः...... (पृ० १६२)। इसी प्रकार जेल से भागा हुआ आर्यक छिपकर चारुदत्त की गाड़ी में बैठा हुआ उसके सामने पहुँच कर उसको देखता है तो उसके मुख से चारुदत्त की प्रशंसा अचानक निकल पड़ती है—"न केवलं श्रुतिरमणीयो दृष्टिरमणीयोऽपि।" (पृ० ४१८) वसन्तसेना की हत्या के आरोप में जब उसे न्यायालय में बुलाया जाता है तो न्यायाधिकारी उसकी दिव्य आकृति देखकर