भारतकोश
मृच्छकटिकम् (सटीक संस्कृत नाटक)

मृच्छकटिकम् (सटीक संस्कृत नाटक)

Mricchakatikam with Sanskrit-Hindi Commentary

महाराज शूद्रक / पं. जयशंकर लाल त्रिपाठी द्वारा

DevanagariSanskritpublished760 पृष्ठ

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भूमिका ३५

उसके द्वारा हत्यारूपी पाप कर्म होने की सम्भावना ही नहीं करते हैं—‘‘घोणोन्नतं मुखमपाङ्गविशालनेत्रम्’’। (९।१६) वहीं मुकदमें के सन्दर्भ में बुलायी गयी वसन्तसेना की माता जब चारुदत्त को देखती है तो अपनी बेटी के प्रेमसमर्पण से सन्तुष्ट हो जाती है—‘‘अयं स चारुदत्तः। सुनिक्षिप्तं खलु दारिकया यौवनम् । (पृ० ५३३ )

वह अभी यौवनसम्पन्न है। प्रथम अंक में चारुदत्त भ्रमवश जब वसन्तसेना पर चादर फेंक देता है तो वह सुगन्धित चादर सूंघकर कहती है ‘‘अनुदासीनमस्य यौवनं प्रतिभासते।’’ (पृ० ११६) आगे चारुदत्त के पुत्र रोहसेन को देखकर कहती है ‘‘अनुकृतमनेन पितू रूपम्।’’ (पृ०३७१) उसका शरीर सुकोमल भी है। न्यायालय में सत्य बोलने के लिये न्यायाधिकारी कहते हैं—

‘‘इदानीं सुकुमारेऽस्मिन् निःशंकं कर्कशाः कशाः ।। ९।३६

(२) परम उदार

वह परम उदार है। वह किसी को निराश नहीं करना चाहता। यहाँ तक कि सेंध लगाकर उसके घर में घुस आने वाले चोर का ज्ञान होने पर वह दुखी हो जाता है क्योंकि वह जानता है कि उसके घर में चुराने लायक कुछ भी नहीं है। चोर का परिश्रम व्यर्थ ही हुआ होगा—‘‘सन्धिच्छेदनखिन्न एव सुचिरं पश्चा-न्निराशो गतः।’’ (३।२३) कर्णपूरक जब मत्त हाथी को मार देता है तो उसके पराक्रम से प्रसन्न होकर उसे अंगूठी देना चाहता है किन्तु अंगुली में अंगूठी न होने से वह अपना दुपट्टा ही दे देता है। (‘‘एकेच शून्यान्याभरणस्थानानि परामृश्य ऊर्ध्वं निःश्वस्यायं ममोपरि निक्षिप्तः।’’ (पृ० १७८) पंचम अंक में चेट जब वसन्तसेना के आगमन का समाचार देता है तो वह अति प्रसन्न होकर अपना दुपट्टा दे देता है--‘‘भद्र ! न कदाचित् प्रियवचनं निष्फलीकृतम्, तद्गृह्यतां पारितोषिकम् । ( इत्युत्तरीयं प्रयच्छति । ) (पृ० ३१८)’’

(३) अतिशय दयालु--

चारुदत्त के मन में प्राणिमात्र के लिये दया है। वह किसी को कभी भी कष्ट नहीं देना चाहता है और न किसी को दुखी देखना चाहता है। इस विषय में चेट द्वारा अपने स्वामी के लिये कही गयीं बातें ध्यान देने योग्य हैं--‘‘सुजनः खलु भृत्यानुकम्पकः।’’ (३।२)

चारुदत्त अपनी आराम के लिये किसी को कष्ट देना पसन्द नहीं करता है। इसी लिये देर रात में सोती हुई रदनिका को जगाने का निषेध कर देता है।

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