भारतकोश
मृच्छकटिकम् (सटीक संस्कृत नाटक)

मृच्छकटिकम् (सटीक संस्कृत नाटक)

Mricchakatikam with Sanskrit-Hindi Commentary

महाराज शूद्रक / पं. जयशंकर लाल त्रिपाठी द्वारा

DevanagariSanskritpublished760 पृष्ठ

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३८६ | मृच्छकटिकम्

( प्रविश्य )

वीरकः--अरे रे अरे ! जय-जयमाण-चन्दनअ-मङ्गलफुल्ल-भद्दप्पमुहा !
( अरे रे अरे ! जय-जयमान-चन्दनक-मङ्गल-पुष्पभद्र-प्रमुखाः ! )

किं अच्छध वीसद्धा जो सो गोवालदारओ रुद्धो ।
भेत्तूण समं वच्चइ णरवइ-हिअअं बन्धणं अ ॥ ५ ॥
( किं स्थ विश्रब्धाः, यः स गोपालदारको रुद्धः ।
भित्वा समं व्रजति नरपतिहृदयं बन्धनञ्च ॥ ५ ॥ )

**विश्रान्तः=**शान्तिमुपगतः, **भारेण आक्रान्तम्=**व्याप्तम्, **आरूढया=**आरुह्य स्थितया, **यातम्=**चलंतम् ।

**अन्वयः--**विश्रब्धाः, किम्, स्थ, यः, गोपालदारकः, अवरुद्धः, सः, नरपति-हृदयम्, बन्धनम्, च, समम्, भित्वा, व्रजति ॥ ५ ॥

**शब्दार्थ--**विश्रब्धाः = निश्चिन्त होकर, किम्=क्यों, स्थ=बैठे हो, यः=जो, गोपालदारकः=अहीर का लड़का आर्यक, अवरुद्धः=कारागार में बन्दी किया गया था, सः = वह, नरपतिहृदयम् = राजा के हृदय को, च=और, बन्धनम्=बन्धन, हथकड़ी बेड़ी को, समम्=एक साथ, भित्वा=तोड़कर, व्रजति=भाग रहा है, भाग गया है ॥ ५ ॥

( प्रवेश करके )

अर्थ—वीरक— अरे रे अरे ! जय, जयमान, चन्दनक, मंगल और पुष्पभद्र आदि प्रधान रक्षकों !

तुम लोग निश्चिन्त होकर क्यों बैठे हुये हो, अहीर का जो लड़का ( आर्यक ) जेलमें बन्द किया गया था वह राजा ( पालक ) के हृदय को और बन्धन को एक साथ तोड़कर जा रहा है, भाग गया है ॥ ५ ॥

टीका—आर्यकस्य पलायनं सूचयति—किमिति । अरे रे इत्यादिगद्यस्थेना-न्वयः । **विश्रब्धाः=**विश्वस्ताः, निश्चिन्ता इति भावः, **किम्=**कथम्, **स्थ=**तिष्ठथ, **यः, गोपालस्य दारकः=**पुत्रकः आर्यकनामा, **रुद्धः=**कारागारेऽवरुद्धः, **सः, नरपतेः=**पाल-कस्य, **हृदयम्=**चित्तम्, जीवनमिति भावः, **बन्धनम्=**शृंखलादिकम्, **च, समम्=**सहैव, **भित्त्वा=**विदार्य, **व्रजति=**इतः पलाप्य गच्छतीत्यर्थः । सहोक्तिरलंकारः आर्या वृत्तम् ॥ ५ ॥

विमर्श—वीरक का आशय यह है कि वह गोपाल बन्धन तोड़कर ही नहीं अपितु राजा पालक का दिल भी तोड़कर भागा है क्योंकि उसके भाग जाने से राजा को भविष्यवाणी के अनुसार अपने राज्य की हानि की शंका बढ़ जाती है । यहाँ सहोक्ति अलंकार है, आर्या छन्द है ॥ ५ ॥

शब्दार्थ — पुरस्तात्=पूरब की ओर, प्रतोलीद्वारे=गली के मुहाने, प्राकारखण्डः=चहारदीवारी का हिस्सा, अधिरुह्य=चढ़कर ।