भारतकोश
मृच्छकटिकम् (सटीक संस्कृत नाटक)

मृच्छकटिकम् (सटीक संस्कृत नाटक)

Mricchakatikam with Sanskrit-Hindi Commentary

महाराज शूद्रक / पं. जयशंकर लाल त्रिपाठी द्वारा

DevanagariSanskritpublished760 पृष्ठ

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४०२ मृच्छकटिकम्

चोल-चीण-वव्वर-खेर-खाण-मुख-मधु-घाट-पहुदाणं मिलिच्छजा- दीणं अणेअ-देस-भासाभिण्णा जहेट्ठं मन्तआम—'दिट्ठो दिट्ठा वा, अज्जो अज्जबा वा।' (अरे ! कः अप्रत्ययस्तव ? वयं दाक्षिणात्या अव्य- क्तभाषिणः। खस-खत्ति-खड़ा-खड्ठो-विलय-कर्णाट-कर्ण-प्रावरण-द्रविड-चोल- चीन-बर्बर-खेर-खान-मुख-मधुघात-प्रभृतीनां म्लेच्छजातीनाम् अनेकदेशभाषाभिज्ञा यथेष्टं मन्त्रयामः—'दृष्टो दृष्टा वा, आर्यः आर्या वा ।' )

वीरकः—णं अहं पि पलोएमि। राअ-अण्णा एसा। अहं रण्णो पच्चइदो। (ननु अहमपि प्रलोकयामि । राजाज्ञा एषा । अहं राज्ञः प्रत्ययितः । )

चन्दनकः—ताकि अहं अप्पच्चइदो संवृत्तो। (तत् किमहमप्रत्ययितः संवृत्तः ? )

वीरकः—णं सामि-णिओओ। (ननु स्वामिनियोगः । )

चन्दनकः—( स्वगतम् ) अज्जगोवालदारओ अज्जचारुदत्तस्स पवहणं अहिरुहिअ अवक्कमदि ति जइ कहिज्जदि, तदो अज्जचारुदत्तो रण्णा सासिज्जइ, ता को एत्थ उवाओ ? (विचिन्त्य) कण्णाट-कलह-प्पओअं कलेमि। (प्रकाशम्) अरे वीरअ ! मए चन्दणकेण पलोइदं पुणो वि तुमं पलोएसि, को तुमं ? (आर्यगोपालदारकः आर्यचारुदत्तस्य प्रवहणमभिरुह्य अपक्रामतीति यदि कथ्यते, तदा आर्यचारुदत्तो राज्ञा शिष्यते, तत् कोऽत्र उपायः ? कर्णाट-कलह-प्रयोगं करोमि। अरे वीरक ! मया चन्दनेकेन प्रलोकितं पुनरपि


जा रहा है, शिष्यते=दण्डित किया जायगा। कर्णाटकलहप्रयोगम् = कर्नाटक के लोगों के झगड़े को अपनाना, पूज्यमानः=पूज्य माने जाने वाले ।

**अर्थ—चन्दनक—**अरे तुम्हारा कैसा अविश्वास ? हम दक्षिण देशवाले अस्पष्ट बोलने वाले हैं । खस, खत्ति, खड़ा, खड्ठ, बिड, कर्णाट, कर्ण, प्रावरण, द्राविड, चोल, चीन, बर्बर, खेर, खान, मुख, मधुघात आदि म्लेच्छ जातियों की अनेक देशी भाषाओं को जानने वाले हम लोग अपनी इच्छा के अनुसार बोलते हैं—'दृष्टः, अथवा दृष्टा, आर्यः अथवा आर्या ।'

**वीरक—**अरे ! मैं भी ठीक से देख लूँ । यह राजा की आज्ञा है। मैं राजा का विश्वासपात्र हूँ ।

**चन्दनक—**तो क्या मैं अविश्वस्त हो गया ?

वीरक—( नहीं ) यह तो राजा का कार्य=आज्ञा है ।

चन्दनक—( अपने आप में ) आर्य गोपालपुत्र आर्य चारुदत्त की गाड़ी पर बैठ कर भाग रहा है—ऐसा यदि कहा जाता है तो आर्य चारुदत्त को राजा दण्ड देगा, इस लिये अब यहाँ क्या उपाय है ! ( सोच कर ) कर्णाटकलह का दिखावा