मृच्छकटिकम् (सटीक संस्कृत नाटक)
Mricchakatikam with Sanskrit-Hindi Commentary
महाराज शूद्रक / पं. जयशंकर लाल त्रिपाठी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४८२ मृच्छकटिकम्
इच्छन्तं मम णेच्छति त्ति गणिआ लोशेण मे मालिदा शुण्णे पुप्फकलण्डके त्ति शहशा पाशेण उत्ताशिदा। शे वा वञ्चिद भादुके मम पिदा मादेव शा दोप्पदी जे शे पेक्खदि णेदिशं ववशिदं पुत्ताह शूलत्तणं ॥ ३७ ॥ ( इच्छन्तं मां नेच्छतीति गणिका रोषेण मया मारिता शून्ये पुष्पकरण्डक इति सहसा पाशेन उत्त्रासिता। स वा वञ्चितो भ्राता मम पिता मातेव सा द्रौपदी योऽसौ पश्यति नेदृशं व्यवसितं पुत्रस्य शूरत्वम् ॥ ३७ ॥ )
अन्वयः- इच्छन्तम्, माम्, गणिका, न, इच्छति, इति, रोषेण, मया, शून्ये, पुष्पकरण्डके, सहसा, पाशेन, उत्त्रासिता, मारिता, च, सः, मम, भ्राता, वा, पिता, वञ्चितः, द्रौपदी, इव, सा, माता, च, यः, असौ, पुत्रस्य, ईदृशम्, शूरत्वम्, व्यवसितम्, च, न, पश्यति ॥ ३७ ॥
शब्दार्थ-- इच्छन्तम्=[ वसन्तसेना को ] चाहने वाले, माम्=मुझ शकार को, गणिका=वैश्या वसन्तसेना, न=नहीं, इच्छति=चाहती है, इति=इसलिये, रोषेण=गुस्सा से, मया=मेरे द्वारा, शकार के द्वारा, शून्ये=निर्जन, पुष्पकरण्डके=इस नाम वाले बगीचे में, सहसा=अचानक, पाशेन=फंन्दे से, उत्त्रासिता=पीडित की गयी, च=और, मारिता=मार डाली गयी, सः=वह, मम=मेरा, भ्राता=भाई, वा=अथवा, पिता=पिता, वञ्चितः=वञ्चित रहे [ नहीं देख सके ],च =और, द्रौपदी=पाण्डवपत्नी, इव=के समान, सा=वह, माता=मां, [भी वंचित रही], यः=जो, असौ=वह, पुत्रस्य=पुत्र शकार के, ईदृशम्=इस प्रकार की, शूरत्वम्=बहादुरी को, च=और, व्यवसितम्=प्रयास को, न=नहीं, पश्यति=देख रहे हैं, देख पाये हैं ॥ ३७ ॥
अर्थ--[ वसन्तसेना को ] चाहने वाले मुझ शकार को वेश्या [ वसन्तसेना ] नहीं चाहती है इसलिये गुस्सा के कारण मैंने सूनसान पुष्पकरण्डक उद्यान में फंदे से पीडित कर ( गला दबाकर ) मार डाला। वह मेरे पिता और द्रौपदी के समान मेरी माता [ मेरे पराक्रम को देखने से ] वंचित रह गये जिन्होंने अपने पुत्र की इस की हुई शूरता को नहीं देखा ॥ ३७ ॥
टीका-- वसन्तसेनां हत्वा शकारः स्वशूरत्वदर्शनात् वञ्चितं पित्रादिकं स्मरति-इच्छन्तमिति । इच्छन्तम्=अभिलषन्तम्, रन्तुमिति शेषः, माम्=शकारम्, न=नैव, इच्छति=अभिलषति, इति=अतो हेतोः, रोषेण=क्रोधेन, मया=शकारेण, शून्ये=निर्जने, पुष्पकरण्डके=एतन्नाम्ना प्रसिद्धे, राजोद्याने, गणिका=वसन्तसेना उत्त्रासिता=भयं प्रापिता, च=तथा, सहसा=झंटिति, पाशेन=रज्जुरूपेण बाहुना, मारिता=हता, सः=प्रसिद्धः, मम=शकारस्य, भ्राता=सहोदरः, वा=अथवा, पिता=