भारतकोश
मृच्छकटिकम् (सटीक संस्कृत नाटक)

मृच्छकटिकम् (सटीक संस्कृत नाटक)

Mricchakatikam with Sanskrit-Hindi Commentary

महाराज शूद्रक / पं. जयशंकर लाल त्रिपाठी द्वारा

DevanagariSanskritpublished760 पृष्ठ

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पृष्ठ 628

५४० मृच्छकटिकम्

आर्यचारुदत्तः कथमकार्यं करिष्यति।

कृत्वा समुदमुदकोच्छ्रयमात्रशेषं दत्तानि येन हि घनान्यनपेक्षितानि। स श्रेयसां कथमिवैकनिधिर्महात्मा पापं करिष्यति धनार्थमवैरिजुष्टम् ? ।। २२ ।।


तुम नीच होकर वेद के अर्थों को कह रहे हो किन्तु तुम्हारी जीभ नहीं गिर गयी। दोपहर में सूर्य को देख रहे हो, किन्तु तुम्हारी आँख नहीं चौंधिया गयी। जलती हुई आग के बीच में हाथ डाल रहे हो, किन्तु वह जल नहीं रहा है। चारुदत्त को सच्चरित्र से गिरा रहे हो, यह पृथ्वी तुम्हारा हरण नहीं कर लेती है ॥२१॥

टीका--चारुदत्तं दूषयतस्तव शरीरं न नश्यतीति आश्चर्यं व्यनक्ति-वेदार्थेति। त्वम्=शकारः, वेदार्थान्=वेदप्रतिपाद्यार्थान्, वदसि=कथयसि, ते=तव, शकारस्य, जिह्वा=रसना, न च=न हि, निपतिता=स्खलिता, पृथग्भूय भूमौ पतितेति भावः, मध्याह्ने=मध्यन्दिने, अर्कम्=सूर्यम्, वीक्षसे=पश्यसि, तव=शकारस्य, दृष्टिः=चक्षुः, सहसा=अकस्मादेव, न=नैव, विचलिता=उपहता, तथा, दीप्ताग्नेः=प्रज्वलितानलस्य, अन्तः=मध्ये, पाणिम्=हस्तम्, क्षिपसि=पातयसि, ते=तव, स च=तादृशोऽग्नि-मध्यस्थो हस्तः, न=नैव, दग्धः=भस्मीभूतः, भवति=जायते। चारुदत्तम्=एतन्नामकं निर्मलचरित्रम्, चारित्र्यात्=सदाचारात्, चलयसि=भ्रंशयसि, तथापि, भूः=धरा, ते=तव,शकारस्य, देहम्=शरीरम्, नो=नैव, हरति=मुष्णाति। चलधातौमित्त्वेन ह्रस्वतया 'चलयसि' इत्येव रूप शुद्धं बोध्यम् ॥२१॥

अन्वयः--हि, येन, समुद्रम्, उदकोच्छ्रयमात्रशेषम्, कृत्वा, अनपेक्षितानि, धनानि, दत्तानि, श्रेयसाम्, एकनिधिः, सः, महात्मा, धनार्थम्, अवैरिपुष्टम्, पापम्, कथम् इव, करिष्यति ॥२२।

शब्दार्थ--हि=क्योंकि, येन=जिस चारुदत्त ने, समुद्रम्=समुद्र को, उदकोच्छ्रय-मात्रशेषम्=जल का पुञ्जमात्र, कृत्वा=बना कर, अनपेक्षितानि=बिना याचना किये गये, बिन मांगे, धनानि=धन, सम्पत्ति, दत्तानि=दे दिये, बांट दिये, श्रेयसाम्=कल्याणों का, एकनिधिः=एक आश्रय, सः=वह, महात्मा=महान् आत्मा वाला, अति उदार, चारुदत्त, धनार्थम्=धन के लिये, अवैरिजुष्टम्=शत्रुओं द्वारा भी न करने योग्य, पापम्=वसन्तसेना की हत्यारूपी घृणित कर्म, कथम् इव=किस प्रकार, करिष्यति=करेगा ? ॥२२॥

अर्थ--आर्य चारुदत्त अकार्य कैसे कर सकते हैं --