भारतकोश
मृच्छकटिकम् (सटीक संस्कृत नाटक)

मृच्छकटिकम् (सटीक संस्कृत नाटक)

Mricchakatikam with Sanskrit-Hindi Commentary

महाराज शूद्रक / पं. जयशंकर लाल त्रिपाठी द्वारा

DevanagariSanskritpublished760 पृष्ठ

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नवमोऽङ्कः ५६१

चारुदत्तः—

अपापानां कुले जाते मयि पापं न विद्यते । यदि सम्भाव्यते पापमपापेन च किं मया ॥ ३७ ॥

अर्थ—श्रेष्ठी और कायस्थ—आर्यचारुदत्त ! सच बोलिये —
इस समय तुम्हारे सुकोमल शरीर पर कठोर कोड़े हम लोगों के मनोरथों के साथ साथ निश्चितरूप से गिरेंगे । अर्थात् हमारी अभिलाषाओं और तुम्हारे ऊपर दण्ड रूप में कोड़ों का गिरना साथ साथ होगा ॥ ३६ ॥

टीका —न्यायालये मिथ्याभाषणस्य भयानकं फलं प्रतिपादयतः-इदानीमिति । इदानीम्=अधुना, अतिशीघ्रमेवेत्यर्थः सुकुमारे=सुकोमले, अस्मिन्=पुरोवर्तिनि, तव=चारुदत्तस्येत्यर्थः, गात्रे=शरीरे, कर्कशाः=कठोराः, कशाः=अश्वादेस्ताडन्यः, अस्माकम्=न्यायाधिकारिणाम्, मनोरथैः=अभिलाषैः, तव निर्दोषताप्रमाणानुसन्धानार्थं सततमेव व्याकुलैः, सह=सार्द्धम्, निःशङ्कम्=शंकारहितम्, अन्यत्र निर्णीयमित्यर्थः, पतिष्यन्ति=तवोपरि निक्षिप्ता भविष्यन्ति, अस्माकं मनोरथा विफलाः भविष्यन्तीति भावः । एवञ्च तवास्माकञ्च सममेव कष्टोत्पत्तिरिति तद्भावः । सहोक्तिरलंकारः, पथ्यावक्त्रं वृत्तम् ॥३६॥

**अन्वयः—**अपापानाम्, कुले, जाते, मयि, पापम्, न, विद्यते, यदि; [ मयि ] पापम्, सम्भाव्यते, ( तदा ) अपापेन, च, मया, किम् ॥३७॥

**शब्दार्थ—**अपापानाम्=पापरहित लोगों के, कुले=वंश में, जाते=पैदा होने वाले, मयि=मुझ चारुदत्त में, पापम्=पाप, न=नहीं, विद्यते=वर्तमान है, यदि=अगर, ( मयि=मुझ में ) पापम्=पाप, सम्भाव्यते=सम्भावित किया जाता है, सोंचा जाता है, ( तदा=तब ), अपापेन=निष्पाप, च=भी, मया=मेरे द्वारा, किम्=क्या ( लाभ ) ? ॥३७॥

अर्थ--चारुदत्त —
पापरहित लोगों के कुल में उत्पन्न होने वाले मुझ में पाप नहीं है। यदि ( लोगों द्वारा मुझ पर ) पाप सोंचा जाता है तब पापरहित भी मुझसे क्या ( लाभ ) ? अर्थात् निष्पाप होना ही पर्याप्त नहीं, लोगों द्वारा निष्पाप समझा जाना ही उचित होता है ॥३७॥

टीका—स्वस्य दोषरहितत्वेऽपि लोकैर्यदि दोषवत्त्वमुच्यते तदा जीवनं व्यर्थमिति प्रतिपादयति—अपापानामिति । अपापानाम्=पापरहितानाम्, पुण्यवतामित्यर्थः, कुले=वंशे, जाते=उत्पन्ने, मयि=चारुदत्ते, पापम्=कल्मषम्, न=नैव विद्यते=वर्तते, एवंस्थितौ सत्यामपि यदि लोकैः मयि, पापम्=अधमंम्, सम्भाव्यते=

३६ मृ०