भारतकोश
मृच्छकटिकम् (सटीक संस्कृत नाटक)

मृच्छकटिकम् (सटीक संस्कृत नाटक)

Mricchakatikam with Sanskrit-Hindi Commentary

महाराज शूद्रक / पं. जयशंकर लाल त्रिपाठी द्वारा

DevanagariSanskritpublished760 पृष्ठ

पृष्ठ 66, कुल 760 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 66

भूमिका ५५

अलं सन्तप्तेन, प्रणयिजनसंक्रामितविभवस्य, सुरजनपीतशेषस्य प्रतिपच्चन्द्रस्येव परिक्षयोऽपि तेऽधिकतरं रमणीयः ।” (पृ० ४४)

चारुदत्त की मानप्रतिष्ठा की रक्षा के लिये यह झूठ बोलने से भी नहीं डरता है। वसन्तसेना के गहनों के चोरी चले जाने के बाद चारुदत्त को अतिखिन्न देखकर यह कहता है—"अहं खलु अपलपिष्यामि –केन दत्तम् ? केन गृहीतम् ? को वा साक्षी ? इति।” (पृ० २२३) चारुदत्त की आज्ञा से यह वसन्तसेना के पास जाकर झूठ बोल देता है कि चारुदत्त उसके गहनों को जुआ में हार गया है। (पृ० २६६)

यह चारुदत्त के समान ही उसके पुत्र और पत्नी से भी सच्चा अनुराग रखता है। उनके सुख दुख के विषय में सावधान रहता है।

संक्षेप में, यहाँ विदूषक एक सच्चा मित्र, बुद्धिमान साथी और हर परिस्थिति में साथ निभाने वाला सहयोगी दिखाई देता है। यह केवल हंसी या मजाक का पात्र नहीं है। इसने नाटक के कथानक-संयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है।

शर्विलक

यह ब्राह्मणकुलोत्पन्न किन्तु भ्रष्ट संस्कारवाला है। इसके पूर्वज चारों वेदों के ज्ञाता और दान न लेने वाले उत्कृष्ट ब्राह्मण थे। (पृ० २१०) कुसंगति से अथवा परिस्थितिवश यह चोरी की शिक्षा लेकर उसमें अपने को निष्णात मानने लगता है। यह बहुत बुद्धिमान है। किन्तु अपनी बुद्धि का दुरुपयोग भी करता है। वेश्यासंसर्ग के फलस्वरूप वसन्तसेना की परिचारिका मदनिका पर आसक्त हो जाता हैं। यह हर कीमत पर उसे प्राप्त करना चाहता है। शर्त के अनुसार भारी धनराशि देकर मदनिका को मुक्त करा कर पाया जा सकता है। इस काम के लिये यह चोरी करने लगता है। यह सम्भवतः उज्जैन का मूल निवासी नहीं है। कहीं बाहर से आकर रेभिल के घर पर रुका हुआ है। इसी लिये चारुदत्त की निर्धनता से परिचित नहीं है। काफी परिश्रम करके उसके घर सेंध लगाता है। यह चोरी को वास्तव में अच्छा काम नहीं समझता है। फिर भी नौकरी आदि से धनार्जन की अपेक्षा चोरी ही अच्छी मानता है। (३।११)

यह बुद्धिमान है। चोरी करते समय जब सांप ने इसकी अंगुली डँस ली है तब तत्काल अपने जनेऊ का उपयोग करता है और बांध कर विष का प्रभाव रोक लेता है। (पृ० २०५) पुराना किवाड़ खोलने पर आवाज न करें इसके लिये नीचे पानी छिड़क लेता है। घर में स्वयं घुसने के पहले एक पुतला को प्रवेश करा कर निरापद स्थिति जान लेता है तब स्वयं प्रवेश करता है। (पृ० २०६)