मृच्छकटिकम् (सटीक संस्कृत नाटक)
Mricchakatikam with Sanskrit-Hindi Commentary
महाराज शूद्रक / पं. जयशंकर लाल त्रिपाठी द्वारा
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चोरी में भी इसके अपने कुछ सिद्धान्त हैं। बलपूर्वक चोरी करना ठीक नहीं मानता है। जहाँ केवल स्त्री है वहाँ चोरी करना या स्त्री पर प्रहार करना अच्छा नहीं समझता है। मदनिका के सामने अपने चोर्यकार्य की भी विशेषता प्रकट करता हुआ कहता है —
“कार्याकार्यविचारिणी मम मतिश्चौर्येऽपि नित्यं स्थिता।” ४।६
यह परिस्थितिवश चोर बना है। अतः जब चारुदत्त के यहाँ घुसकर दयनीय दशा देखता है तो उसके घर चोरी करने का विचार छोड़ देता है— “अथवा न युक्तं तुल्यावस्थं कुलपुत्रजनं पीडयितुम्, तद् गच्छामि।” (पृ० २०९) किन्तु विदूषक द्वारा शपथ दिलाने पर ही स्वर्णभाण्ड ले लेता है। (पृ० २१०)
यह यद्यपि मदनिका पर आसक्त है तथापि अपनी प्रतिष्ठा की हानि नहीं सहना चाहता है। यह वेश्याओं की सारी गतिविधियों से भली भाँति परिचित है। यह उन पर विश्वास करने के पक्ष में नहीं है। (४।१०-१६)
चोरी करके उन गहनों से मदनिका को छुड़वाने के लिये वसन्तसेना के घर पहुँचता है। वहाँ मदनिका के आचरण पर कुछ शंका होते ही यह उत्तेजित होकर चारुदत्त का वध करने को तैयार हो जाता है। किन्तु जब वस्तुस्थिति का ज्ञान होता है। तब अपने कर्म का पश्चात्ताप करता है। (४।१८) मदनिका द्वारा बहुत समझाये जाने पर यह उन गहनों को लेकर वसन्तसेना के पास जाकर गहने देकर झटपट चला जाना पसन्द करता है। परन्तु वसन्तसेना को सारी घटना का ज्ञान हो चुका है अतः वह मदनिका को वधू बनाकर गाड़ी पर बैठा कर इसके साथ विदा कर देती है। इससे यह बहुत प्रसन्न हो कर कृतज्ञता प्रकट करता है। (पृ० २६६)
यह एक सच्चा मित्र है। यह मित्रता को उच्चकोटि का मानता है। (४।२५) जब नयी पत्नी मदनिका को लेकर जाता है, मार्ग में अपने प्रिय मित्र गोपालपुत्र आर्यक के बन्दी होने का समाचार मिलता है तो बेचैन हो जाता है। यह उसे छुड़ाने की सोचता है। मदनिका उसमें सहयोगिनी बनती है। और अकेले घर जाना चाहती है। इससे यह बहुत खुश हो जाता है। और गाड़ीवान द्वारा मदनिका को घर भेजकर आर्यक को छुड़ाने की योजना में निकल जाता है। (पृ० २७१)
तीव्रबुद्धि वाला होने के कारण यह तत्कालीन राजा पालक के विरुद्ध षड्यन्त्र करने में सफल हो जाता है। यह यज्ञशाला में स्थित राजा पालक पर आक्रमण करके पशु के समान वध कराने में सफल हो जाता है। (१०।५१)
आर्यक के राजा बनते ही यह सर्वप्रथम चारुदत्त को मृत्युदण्ड से मुक्त कराना चाहता है क्योंकि आर्यक के प्राणों की रक्षा चारुदत्त की गाड़ी में छिप कर बैठने