भारतकोश
मृच्छकटिकम् (सटीक संस्कृत नाटक)

मृच्छकटिकम् (सटीक संस्कृत नाटक)

Mricchakatikam with Sanskrit-Hindi Commentary

महाराज शूद्रक / पं. जयशंकर लाल त्रिपाठी द्वारा

DevanagariSanskritpublished760 पृष्ठ

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दशमोऽङ्कः ५८१

चारुदत्त:--( सनिर्वेदं स्वगतम् )

मख-शत-परिपूतं गोत्रमुद्भासितं मे सदसि निबिडचैत्यब्रह्मघोषैः पुरस्तात् । मम मरणदशायां वर्तमानस्य पापै- स्तदसद्शमनुष्यैर्घोष्यते घोषणायाम् ॥ १२ ॥

गया और स्वयं भी इसने अपराध स्वीकार कर लिया है। इसके बाद राजा पालक ने इसको मारने के लिये हम दोनों को आदेश दिया है। यदि कोई दूसरा भी ऐसा दोनों लोकों के विरुद्ध पापकर्म करेगा तो राजा पालक उसे भी इसी प्रकार दण्ड देगा।

अन्वयः- पुरस्तात्, मे, मखशतपरिपूतम्, गोत्रम्, सदसि, निविडचैत्यब्रह्म-घोषैः, उद्भासितम्, [ आसीत् ], मरणदशायाम्, वर्तमानस्य, मम, तत्, पापैः, असदृशमनुष्यैः, घोषणायाम्, घुष्यते ॥ १२ ॥

शब्दार्थ- पुरस्तात्=पहले, मे=मेरा, मखशतपरिपूतम्=सैकड़ों यज्ञों से खूब पवित्र किया गया, गोत्रम्=वंश, सदसि=सभा में, निविडचैत्यब्रह्मघोषैः=लोगों से भरे हुये यज्ञस्थलों पर वेदों के उद्घोषों से, उद्भासितम्=प्रकाशित, [ आसीत्=हुआ करता था ], मरणदशायाम्=मरने की अवस्था में वर्तमान, मम=मेरा, तत्=वही (कुल), पापैः=पापी, असदृशमनुष्यैः=अयोग्य=नीच लोगों के द्वारा, घोषणायाम्=घोषणा (के स्थान) में, घुष्यते=घोषित किया जा रहा है ॥ १२ ॥

अर्थ-चारुदत्त--(ग्लानिके साथ अपने में) -- पहले सैकड़ों यज्ञों से खूब पवित्र किया गया मेरा जो कुल सभास्थल में जन-संकुलित यज्ञस्थानों में वेदों के पाठों से प्रकाशित हुआ था, मरण की अवस्था में वर्तमान मेरा वही कुल पापी, अयोग्य व्यक्तियों द्वारा घोषणा (के स्थान) में घोषित किया जा रहा है ॥ १२ ॥

टीका- घोषणास्थले चाण्डालानां वचनान्याकर्ण्य स्वपूर्वजानां कीर्त्यादिकं संस्मृत्य विषादं प्रकटयन्नाह - मखेति। पुरस्तात्=पूर्वस्मिन् काले, मखानाम्=यज्ञानाम्, शतैः परिपूतम्=भृशं पवित्रम्, यत्=लोकविश्रुतम् गोत्रम्=कुलम् सदसि=सभास्थले, निबिडानि=निमन्त्रितजनसंकुलानि यानि चैत्यानि = यज्ञानुष्ठानादि-स्थानानि तेषु ये ब्रह्मघोषाः=वेदमन्त्राणामुच्चारणम्, तैः, उद्भासितम्=प्रकाशितम्, आसीदिति शेषः, साम्प्रतम्, मरणदशायाम्=मरणावस्थायाम्, वर्तमानस्य=विद्यमानस्य, मम=चारुदत्तस्येत्यर्थः, तत्=लोकप्रसिद्धं पवित्रं कुलम्, पापैः=पापप-रायणैः, असदृशमनुष्यैः=अयोग्यै=नीचैः जनैः, चाण्डालैरित्यर्थः, घोषणायाम्=घोषणा-