मृच्छकटिकम् (सटीक संस्कृत नाटक)
Mricchakatikam with Sanskrit-Hindi Commentary
महाराज शूद्रक / पं. जयशंकर लाल त्रिपाठी द्वारा
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(कर्णं दत्त्वा) भिण्ण-कंश-शङ्खणाए चाण्डालवाआए शलसंजोए, जधा अ एशे उक्खालिदे वज्झाडिण्डिमशद्दे पडहाणं अ शुणीअदि, तथा तक्केमि, दलिद्द-चालुदत्ताके, वज्झठ्ठाणं णीअदि त्ति । ता पेक्खिशं शत्तुविणाशे णाम महन्ते हलक्कश पलिदोशे होदि । शुदं अ मए, जेवि किल शत्तुं वावादअन्तं पेक्खदि तश्श अण्णश्शिं जम्मन्तले अक्खिलोगे ण होदि । मए क्खु विशगणिठगब्भपविट्टेण विअ कीडएण किं पि अन्तलं मग्गमाणेण उप्पाडिदे ताह दलिद्द-चालुदत्ताह विणाशे । शम्पदं अत्तण-केलिकाए पाशादवालग-पदोलिकाए अहिलुहिअ अत्तणो पलक्कमं पेक्खामि । (तथा कृत्वा दृष्ट्वा च) हीही ! एदाह दलिद्द-चालुदत्ताह वज्जं णीअमाणाह एवड्डे जणशम्मददे, ज वेलं अम्हालिशे पवले वलमणुश्शे वज्जं णीअदि, तं वेलं कीदिशे भवे ? (निरीक्ष्य) कधं एशं शे णव-बलद्दके विअ-मण्डिडे दक्खिणं दिशं णीअदि । अध किं णिमित्तं मम केलिकाए पाशाद-वालगपदोलिकाए शमीवे घोषणा णिवडिदा णिवालिदा अ ? (विलोक्य)
टीका—चारुदत्तस्य मृत्युदण्डमाकर्ण्य अतिहृष्टः शकारः साम्प्रतं स्वप्रसन्नतां सम्पन्नतां च प्रकटयितुमाह—मांसेनेति । मया=शकारेण आत्मनः=स्वस्य, गेहे=गृहे, तिक्तेन=तिक्तरसेन, आम्लेन=आम्लरसेन च, शाकेन=पत्रादि-रूपेण भांज्य-पदार्थ-विशेषेण समत्स्यकेन=मत्स्यसहितेन, सूपेन=द्विदलेन, शालीयकूरेण=शालितण्डुलविशेषप्रभवेण, अन्नविशेषेण, गुडोदनेन=गुडमिश्रितेनौदनेन सह, भक्तम्=अन्नपरिणामविशेषः, भुक्तम्=खादितम् । अत्र सहार्थे तृतीया बोध्या । पुनरुक्तिदोषस्तु शकारस्य वचनेषु सोढव्य एव । एवञ्चेदृशविविधव्यञ्जनाना-मास्वादं गृहीत्वाहं सर्वत उत्कृष्ट इति दर्पं प्रकटयतीति भावः । इन्द्रवज्रा वृत्तम् ॥२६॥
शब्दार्थ—भिन्नकांस्यवत्=फूटे हुये कांसे के समान, स्वरसंयोगः=स्वरों का मेल अर्थात् आवाज, उद्गीतः=ऊपर उठा हुआ, वध्यस्थानम्=वध करने की जगह, विषन्थिगर्भ-प्रविष्टकेन=विषवृक्ष की गांठ के भीतर घुसे हुये, उत्पादितः=बना दिया, जनसंमर्दः=लोगों की भीड़, नवबलीवर्दः=नये बैल, निपतिता=की गयी, अवतीर्य=नीचे उतर कर ।
अर्थ—(कान लगाकर) फुटे हुये कांसे के (वर्तन के) समान खन खन करती हुयी चाण्डालों की वाणी की आवाज [सुनाई दे रही है] और जिस प्रकार यह वध के समय की तेज ढोल की आवाज तथा नगाड़ों की आवाज सुनाई दे रही है उससे मैं यह अनुमान करता हूँ कि चारुदत्त को वध के स्थान [श्मशान] पर ले जाया जा रहा है। तो देखूंगा। दुश्मन के मरने पर हृदय को बहुत आनन्द