मृच्छकटिकम् (सटीक संस्कृत नाटक)
Mricchakatikam with Sanskrit-Hindi Commentary
महाराज शूद्रक / पं. जयशंकर लाल त्रिपाठी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें६२२ मृच्छकटिकम्
अथवा---
किं नु स्वर्गात्पुनः प्राप्ता मम जीवातुकाम्यया । तस्याः रूपानुरूपेण किमुतान्येयमागता ॥ ४१ ॥
समागता ? वा, मम, भ्रान्तम्, मनः, एनाम्, पश्यति, अथ, वसन्तसेना न, मृता, सा, एव, [ इयम् ] ॥ ४० ॥
शब्दार्थ---इयम्=यह सामने खड़ी, वसन्तसेना=वसन्तसेना, है, किम्=क्या ? ( अथवा ) द्वितीया=दूसरी कोई है ? किम्वा=अथवा क्या, इत्थम्=इस प्रकार, दिवः=स्वर्ग से, समागता=आयी है, वा=अथवा, भ्रान्तम्=भ्रम में पड़ा हुआ, मम=मेरा, चारुदत्त का, मनः=मन, एनाम्=इसे वसन्तसेना को, पश्यति=देख रहा है ? अथ=अथवा, वसन्तसेना=वसन्तसेना, न=नहीं, मृता=मरी है, सा=वह, एव=ही, [ इयम्=यह, है । ] ॥४०॥
( और देखकर )
अर्थ--यह क्या वसन्तसेना है, अथवा कोई दूसरी स्त्री है ? क्या वही इस प्रकार [मुझे बचाने के लिये] स्वर्ग से आयी ? अथवा भ्रम में पड़ा हुआ मेरा मन उसे [वसन्तसेना को] देख रहा है ? अथवा वसन्तसेना नहीं मरी है, यह वही है ॥४०॥
टीका--मूर्तिमतीं पुरोवर्तमानां स्त्रियमवलोक्य चारुदत्तस्तद्विषये वितर्कते-वसन्तसेनेति । इयम्=पुरो दृश्यमाना, वसन्तसेना=मम प्रेयसी, किम् ? अथवा, द्वितीया=अपरा, वसन्तसेनाभिन्ना काचन स्त्री ? किम्वा, सैव=मत्प्रेयसी वसन्तसेना एव, इत्थम्=एवं प्रकारेण, मरणानन्तरमपि मम रक्षणार्थमिति भावः, दिवः=स्वर्गात्, समागता=अत्रोपस्थिता किम् ? वा=अथवा, भ्रान्तम्=भ्रमपतितम्, मे=चारुदत्तस्य, मनः=चित्तम्, एनाम्=पुरोवर्तिनीम् स्त्रियम्, वसन्तसेनातः भिन्नामपि तद्रूपेण, पश्यति=अवलोकयति किम् ? अथ=अथवा, वसन्तसेना=मम प्रेयसी वसन्तसेना, न=नैव, मृता, सा=पूर्वानुभूता, एव, इयं स्त्रीति बोध्यम् । एवञ्चैकस्यामेव विविध-सन्देहसत्त्वात् सन्देहालंकारः, स च निश्चयान्त इति । उपजातिवृत्तम् ॥४०॥
अन्वयः--मम, जीवातुकाम्यया, स्वर्गात्, पुनः, प्राप्ता, किम्, नु ? उत, तस्याः, रूपानुरूपेण, इयम्, अन्या, आगता, किम् ? ॥ ४१ ॥
शब्दार्थ--मम=मुझ ( चारुदत्त ) को, जीवातुकाम्यया=जिन्दा कराने की इच्छा से, स्वर्गात्=स्वर्ग से, पुनः=फिर, प्राप्ता=( यहाँ ) आई हुई है, किम् नु=क्या ? अन्या=अथवा, तस्याः=उसके, रूपानुरूपेण=रूप के समान रूप से, इयम्,=यह, अन्या=दूसरी, आगता=आई है, किम्=क्या ? ॥ ४१ ॥
अर्थ--अथवा---
मुझे जिन्दा कराने की इच्छा से यह स्वर्ग से फिर ( वापस ) आ गयी है