भारतकोश
मृच्छकटिकम् (सटीक संस्कृत नाटक)

मृच्छकटिकम् (सटीक संस्कृत नाटक)

Mricchakatikam with Sanskrit-Hindi Commentary

महाराज शूद्रक / पं. जयशंकर लाल त्रिपाठी द्वारा

DevanagariSanskritpublished760 पृष्ठ

पृष्ठ 726, कुल 760 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 726

६३८ मृच्छकटिकम्

( नेपथ्ये पौराः--वावादेह, किं णिमित्तं पादकी जीवावीअदि ? ) ( व्यापादयत, किं निमित्तं पातकी जीव्यते ? )

( वसन्तसेना वध्यमालां चारुदत्तस्य कण्ठादपनीय शकारस्योपरि क्षिपति । )

**शकारः--**गब्भदाशीधीए ! पशीद पशीद, ण उण मालेश्शं, ता पलित्ताआहि । ( गर्भदासीपुत्रि ! प्रसीद प्रसीद, न पुनर्मारयिष्यामि, तत् परित्रायस्व । )

**शर्विलकः--**अरे रे ! अपनयत । आर्यचारुदत्त ! आज्ञाप्यताम्--किमस्य पापस्यानुष्ठीयताम् ।

**चारुदत्तः--**किमहं यद् ब्रवीमि तत् क्रियते ?

**शर्विलकः--**कोऽत्र सन्देहः ।

**चारुदत्तः--**सत्यम् ?

**शर्विलकः--**सत्यम् ।

**चारुदत्तः--**यद्येवम्; शीघ्रमयम् --

**शर्विलकः--**किं हन्यताम् ?

**चारुदत्तः--**नहि नहि, मुच्यताम् ।

**शर्विलकः--**किमर्थम् ?


( नेपथ्य में )

**पुरवासी लोग—**मार डालो, यह पापी क्यों जीवित है ?

( वसन्तसेना चारुदत्त के गले से बध्यमाला को हटाकर शकार के ऊपर फेंक देती है । )

**शकार—**अरे गर्भकाल से ही दासी की बच्ची ! खुश हो जा, खुश हो जा, अब फिर नहीं मारूँगा । इस लिये रक्षा करो ।

**शर्विलक—**अरे रे ! हटाओ [ इसे ] । आर्य चारुदत्त ! आज्ञा दीजिये—इस पापी का क्या किया जाय ?

**चारुदत्त—**क्या जो मैं कहूँगा, वह किया जायगा ?

**शर्विलक—**इसमें क्या सन्देह ?

चारुदत्त— सच ?

शर्विलक— सच ।

**चारुदत्त—**यदि ऐसी बात है तब तो इसे शीघ्र......

**शर्विलक—**क्या मार डाला जाय ?

**चारुदत्त--**नहीं, नहीं, छोड़ दिया जाय ।

**शर्विलक--**किस लिये ?

मृच्छकटिकम् (सटीक संस्कृत नाटक) · पृष्ठ 726, कुल 760 में से · BharatKosha