मृच्छकटिकम् (सटीक संस्कृत नाटक)
Mricchakatikam with Sanskrit-Hindi Commentary
महाराज शूद्रक / पं. जयशंकर लाल त्रिपाठी द्वारा
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पर्दा-प्रथा प्रचलित नहीं थी । इसी लिये दशम अंक में धूता ( चारुदत्त की पत्नी ) सबके सामने आती है । वसन्तसेना द्वारा वधू बनाई गई मदनिका भी पर्दा नहीं करती है। उसे 'वधू' शब्द ही अवगुण्ठन दिया गया है । अन्त में वसन्तसेना को भी 'वधू' बनाया गया है परन्तु पर्दा का कोई संकेत नहीं है । सती-प्रथा का संकेत मिलता है । क्योंकि धूता आत्मदाह करने का प्रयास करती है ।
वेश्या-प्रथा बहुत अधिक प्रचलित थी । उनके दो भेद थे—गणिका और वेश्या । गणिकायें संगीत आदि के माध्यम से लोगों को खुश करके धन अर्जित करती थीं । वसन्तसेना भी इसी प्रकार की थी । उसके पास अतुल वैभव था । वह ऐश्वर्य में कुबेर के समान थी । वेश्याओं के साथ सम्बन्ध रखना साधारण था किन्तु समाज में प्रतिष्ठित नहीं था । इसीलिये शर्विलक उनकी निन्दा करता है । (४।१०-१७) और न्यायालय में पूछे जाने पर चारुदत्त वसन्तसेना के साथ अपना सम्बन्ध बताने में लज्जा का अनुभव करता है । ( पृ० ५३५ ) कुछ साहसी लोग वेश्याओं को पत्नी बनाना चाहते थे । शर्विलक ने मदनिका को वधू बनाया और चारुदत्त के लिये राजा आर्यक ने वसन्तसेना को 'वधू' बनाकर यह सिद्ध किया है ।
दासप्रथा और बंधकप्रथा थी । द्वितीय अंक में जुआ में हारा हुआ संवाहक अपने को बेचकर ऋणमुक्त होना चाहता है । वसन्तसेना के यहाँ अनेक दासियाँ इसी प्रकार बंधक बनाकर रखी गयी थीं । इसी लिये अपनी प्रेयसी मदनिका को छुड़वाने के लिये शर्विलक चोरी करके धन लाता है । शकार का स्थावरक चेट भी इसी प्रकार का था । इसीलिये अन्त में उसे मुक्त करा दिया जाता है ।
जुआ खेलने का बहुत प्रचलन था । उसकी विभिन्न चालें और ढंग प्रचलित थे । उसमें हार जीत का हिसाब रखा जाता था । ( २।२ ) जुये में लिये गये ऋण को वापस करना पड़ता था । इसके लिये न्यायालय भी जाया जाता था । मण्डली से घिर जाने पर जुआ खेलना पड़ता था । उसके कुछ नियम भी प्रचलित थे ।
मदिरालय भी थे । वहाँ लोग जाकर मदिरापान करते थे । मदिरा के विभिन्न रूप प्रचलित थे । ( सीधुसुरासवमत्ता० ४।३० )
राजनीतिक स्थिति—
उस समय की राजनीतिक स्थिति अच्छी नहीं थी । सर्वत्र अराजकता और अव्यवस्था थी । राजा स्वेच्छाचारी था । विलासिता के लिये वह राजमहिषियों के अतिरिक्त कुछ रखैल स्त्रियाँ भी रखता था । 'पालक' राजा ने इसी प्रकार की रखैल शकार की बहिन भी रखी थी । राजा के सम्बन्धी अपने पद का दुरुपयोग करने