मृच्छकटिकम् (सटीक संस्कृत नाटक)
Mricchakatikam with Sanskrit-Hindi Commentary
महाराज शूद्रक / पं. जयशंकर लाल त्रिपाठी द्वारा
पृष्ठ 89, कुल 760 में से
संदर्भ में पढ़ेंपात्र-परिचय
( पुरुषपात्र )
१. सूत्रधार — प्रधान नट, व्यवस्थापक।
२. चारुदत्त — नायक, उज्जयिनी का प्रमुख नागरिक।
३. मैत्रेय — विदूषक, चारुदत्त का मित्र।
४. शकार — प्रतिनायक, राजा पालक का शाला।
५. विट — शकार का सहचर।
६. स्थावरक चेट — शकार का सेवक।
७. संवाहक — चारुदत्त का भूतपूर्व नौकर, जुआरी और बाद में बौद्ध भिक्षु।
८. माथुर — प्रधान जुआरी, सभिक।
९. दर्दुरक — दूसरा जुआरी।
१०. वर्धमानक — चारुदत्त का सेवक।
११. शर्विलक — ब्राह्मण, किन्तु चोर और सच्चा मित्र।
१२. चेट — वसन्तसेना का सेवक।
१३. बन्धुल — वेश्यापुत्र, वसन्तसेना का आश्रित युवक।
१४. कुम्भीलक — वसन्तसेना का सेवक।
१५. विट — वसन्तसेना का सहचर।
१६. रोहसेन — चारुदत्त का पुत्र।
१७. आर्यक — गोपालपुत्र, बन्दी, बाद में राजा।
१८. वीरक — नगररक्षक।
१९. चन्दनक — नगररक्षक।
२०. शोधनक — न्यायालय की सफाई करने बाल।
२१. अधिकरणिक — न्यायाधीश।
२२. श्रेष्ठी — न्याय-निर्णय में सहायक।
२३. कायस्थ — पेशकार, मुकदमालेखक।
२४. चाण्डाल — शूली पर चढ़ाने वाला।
[ मंच पर न आने वाले पात्र ]
जूर्णवृद्ध — चारुदत्त का मित्र।
पालक — उज्जैन का राजा।
रेभिल — उज्जैन का व्यापारी, चारुदत्त का मित्र, विशिष्ट गायक।
सिद्ध — आर्यक की राज्यप्राप्ति की घोषणा करने वाला महात्मा।
( स्त्रीपात्र )
१. नटी — सूत्रधार की पत्नी।
२. वसन्तसेना — नायिका, गणिका।
३. रदनिका — चारुदत्त की सेविका।
४. चेटी — वसन्तसेना की दासी।
५. मदनिका — बसन्तसेना की प्रिय दासी, शर्विलक की प्रेयसी।
६. धूता — चारुदत्त की धर्मपत्नी।
७. छत्रधारिणी — वसन्तसेना की परिचारिका।
८. वृद्धा — वसन्तसेना की माता।