भारतकोश
मुद्राराक्षसम् (सटीक संस्कृत नाटक)

मुद्राराक्षसम् (सटीक संस्कृत नाटक)

Mudrarakshasam Natakam with Hindi Commentary

महाकवि विशाखदत्त द्वारा

DevanagariSanskritpublished488 पृष्ठ

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प्रथमोऽङ्कः ५७

तस्याः परिणाहः विशालता तस्य प्रमाणेन घटिता निर्मिता, इयं—दृश्यमाना, अङ्गुलिमुद्रिका—नामाङ्कितमङ्गुलीयकं, विगलिता—अङ्गुलितश्च्युता, ( सती ) देहलीबन्धे—देहल्या द्वाराधःप्रदेशस्य बन्धः बन्धनस्थानं तत्र, पतिता—भ्रष्टा, उत्थिता—अभिघातात् उत्प्लुता, तया—नार्या, अनवबुद्धैव—अविदिता एव, मम—मे, चरणपार्श्व—पादसमीपं, समागत्य—समेत्य, प्रणामनिभृता—प्रणतिविनीता, कुलवधूः इव—कुलाङ्गना इव, निश्चला—सुस्थिरा, संवृत्ता संजाता । मयापि, अमात्यराक्षसस्य—राक्षसनाम्नो मन्त्रिणः, नामाङ्किता—नाम्ना चिह्निता, इति—एवम् अवलोक्येति शेषः, आर्यस्य—भवतः, पादमूलं—चरणनिकटं, प्रापिता—समानीता । तस्मात्—अतएव, एषः—अयम्, अस्याः—अङ्गुलिमुद्रायाः, आगमः—प्राप्तिः लाभवृत्तान्त इत्यर्थः ।

हिन्दी अनुवाद—उसके बाद एक प्रिय और दर्शनीय शरीर की आकृति वाला लगभग पाँच साल का बालक, जिसकी आंखे बाल-सुलभ कौतूहल से खिल गईं थी, एक कमरे से निकलने लगा । तदनन्तर उसी कमरे के भीतर स्त्रियो का 'हाय निकल गया, हाय निकल गया' इस प्रकार का सन्देह-सूचक भारी शोर मच गया । उसके बाद एक महिला ने दरवाजे से थोड़ा मुँह निकालकर झाँका और निकलते हुए उस बालक को डाँटकर ( अपनी ) कोमल बाँहों से पकड़ लिया । लड़के को रोकने की व्याकुलता के कारण काँपती हुई अँगुलियों वाले उस ( महिला ) के हाथ से निकली हुई यह अँगूठी, जिसकी गठन पुरुष की अँगुली की मोटाई के अनुसार है, चौखठ पर गिर पडी और उछलकर उस ( स्त्री ) के बिना जाने ही मेरे ही पैर के पास आकर प्रणाम करने में संलग्न कुलवधू के समान निश्चल हो गई । मैने भी अमात्य राक्षस के नाम से चिह्नित देखकर इसे आपके चरणों के निकट ला उपस्थित किया । अतएव यह इसकी प्राप्ति ( का समाचार ) है ।

टिप्पणीअपवरकात्—कमरे से । अपव्रियते अनेन अस्मिन् वा इति अप √ वृ + अप् करणे अधिकरणे वा = अपवरः । स एव इति अपवर + कन् स्वार्थे = अपवरकः, तस्मात् । अपादाने पञ्चमी । कोई 'अपवरक' का अर्थ खिड़की करते है । पञ्चवर्षदेशीयः—पाँच साल से कुछ कम अवस्था का । पञ्च वर्षाणि अस्य इति पञ्चवर्षः बहुव्रीहि स० । ईषदूनः पञ्चवर्षः इति पञ्चवर्ष + देशीयर 'ईषदसमाप्तौ कल्पब्देश्यदेशीयरः' इत्यनेन । कुमारकः—बालक ।