मुद्राराक्षसम् (सटीक संस्कृत नाटक)
Mudrarakshasam Natakam with Hindi Commentary
महाकवि विशाखदत्त द्वारा
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मुद्राराक्षसम्
अज्ञात कुमार इति कुमार + कन् अज्ञाते । उत्फुल्ल—विकसित । उद् √फल् + क्त कर्तरि 'ति च' इति सूत्रेण उत्वम् 'उत्फुल्लसंफुल्लयोरुपसंख्यानम्' इति वार्तिकेन लत्व च । परिग्रह—उत्पत्ति, प्राप्ति । परि√ग्रह् + अप् भावे । नामाङ्किता—यहाँ के सन्दर्भ से यह पता चलता है कि अमात्य राक्षस उस बालक का पिता है और वह स्त्री उसकी माता है । नगर से पलायन करने के समय राक्षस ने अपने परिवार को चन्दनदास के घर में छोड़कर स्मारक के रूप में यह नामांकित मुद्रिका अपनी पत्नी को दे रखी है ।
चाणक्य—भद्र ! श्रुतम्, अपसर । ( नचिरादस्य परिश्रमस्यानुरूप फलमधिगमिष्यसि ),
चर—ज अज्जो आणवेदि । ( यदार्य आज्ञापयति । ) [ इति निष्क्रान्त । ]
चाणक्य—शार्ङ्गरव ! शार्ङ्गरव !
[ प्रविश्य ]
शिष्य—उपाध्याय ! आज्ञापय ।
चाणक्य—वत्स ! मसीभाजन पत्रञ्चोपानय ।
शिष्य—यदाज्ञापयत्युपाध्याय । [ इति निष्क्रम्य पुन प्रविश्य ] उपाध्याय ! इद मसीभाजन पत्रञ्च ।
चाणक्य—[ पत्र गृहीत्वा स्वगतम् ] किमत्र लिखामि ? अनेन खलु लेखेन राक्षसो जेतव्य ।
[ प्रविश्य ]
प्रतीहारी—जेदु अज्जो ( जयत्वार्य ) ।
चाणक्य—[ सहर्षमात्मगतम् ] गृहीतो जयशब्द । [ प्रकाशम् ] शोणोत्तरे ! किमागमनप्रयोजनम् ?
हिन्दी अनुवाद—चाणक्य—भद्र ! सुन लिया । जाओ । शीघ्र ही इस परिश्रम के अनुरूप फल प्राप्त करोगे ।
गुप्तचर—श्रीमान् की जैसी आज्ञा । [ बाहर चला जाता है । ]