भारतकोश
मुद्राराक्षसम् (सटीक संस्कृत नाटक)

मुद्राराक्षसम् (सटीक संस्कृत नाटक)

Mudrarakshasam Natakam with Hindi Commentary

महाकवि विशाखदत्त द्वारा

DevanagariSanskritpublished488 पृष्ठ

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१८८ मुद्राराक्षसम्

व्याख्यातत्—मदुक्तवचन, यदि—चेत्, —नहि, प्रत्ययध्वम्—विश्वसित, तदा—तर्हि, एनम्—अमुम्, राजापथ्यकारिणम्—नृपानिष्टविधायिन, वध्यस्थानम्—प्राणदण्डभूमिम्, आनीयमान—प्राप्यमाण, सपुत्रकलत्रम्—सुतस्त्रीसहित, श्रेष्ठिचन्दनदास, प्रेक्षध्वम्—पश्यत । आर्या !—पूज्याः, किं भणथ—किं कथयत ? चन्दनदासस्य, मोक्षोपाय—मुक्तिप्रकारः, किम्, अस्ति—विद्यते ? कुत—कस्मात्, मोक्षोपाय—मुक्तिप्रकार नास्तीत्यर्थःसः—चन्दनदास , यदि—चेत्, अमात्यराक्षसस्य, गृहजन—परिवार, समर्पयति—ददाति, एतत् पुनरस्ति—एष मोक्षोपायो विद्यते । पुन—भूयः, आकाशे—गगने, ( सन्निधापितनेत्र सन् ब्रवीतीत्यर्थ ) किं भणथ—किं ब्रूथ, एष—असौ, शरणागतवत्सल—शरणापन्नेषु अनुरागवान्, आत्मनः—स्वस्य, जीवितस्य—जीवनस्य, कारणेन—हेतुना, ईदृशम्—एतादृशम्, अकार्यं—राक्षसपरिवारसमर्पणरूप कुत्सित कर्मेत्यर्थ , न करिष्यति—न विधास्यति । आर्या !, यद्येव—चन्दनदासः राक्षसपरिवारसमर्पण न करिष्यति इति चेत्, तेन हि—तर्हीत्यर्थ , अस्य—चन्दनदासस्य, शुभगतिम्—सद्गतिम्, अवघत—जानीत । इदानीम्—साम्प्रतम्, युष्माक—भवता, प्रतीकारविचारेण—मोक्षोपायचिन्तनेन, किम्—न किमपीत्यर्थ ।

हिन्दी अनुवाद—इसलिये यदि विश्वास न करो तो इस राजद्रोही सेठ चन्दनदास को स्त्री-पुत्र समेत वध्य-भूमि पर ले जाते हुए देखो [ आकाश की ओर ( देखते हुये ) ] सज्जनो ! क्या कहते हो ? क्या चन्दनदास के छुटकारे का ( कोई ) उपाय है ? इस अभागे के छुटकारे का उपाय कहाँ से हो सकता है ? यदि वह अमात्य राक्षस के परिवार को सौंप देता है तो यह छुटकारे का उपाय हो सकता है। [ पुन आकाश की ओर देखते हुये ] क्या कहते हो ? क्या यह शरण मे आये हुये का प्रेमी ( सेठ चन्दनदास ) अपने जीवन के निमित्त ऐसा कुत्सित कार्य नही करेगा ? सज्जनो ! यदि ऐसी बात है तो इस ( चन्दनदास ) की सद्गति मनाओ। अब तुम्हारे प्रतीकार ( छुटकारे का उपाय ) सोचने से क्या ( लाभ ) ?

टिप्पणीजीवितस्य कारणेन—जीवितस्य यत् कारण प्रेरणा, तेन इत्यपि व्याख्यातुं शक्यते। शुभगतिम्—इसका बाह्य अर्थ है—शरणागत की