भारतकोश
मुद्राराक्षसम् (विशाखदत्त - भारतेन्दु हरिश्चन्द्र हिन्दी अनुवाद)

मुद्राराक्षसम् (विशाखदत्त - भारतेन्दु हरिश्चन्द्र हिन्दी अनुवाद)

Mudrarakshasam of Vishakhadatta Hindi

विशाखदत्त (अनुवादक: भारतेन्दु हरिश्चन्द्र) द्वारा

स्रोत: Mudrarakshas Drama translated into Hindi by Bharatendu Harishchandra (1925) (उद्गम)

DevanagariHindipublished173 पृष्ठ

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१२ मुद्राराक्षस ।

उत्तर देने को एक महीने की मुहलत चाही। राजा ने कहा— आज से ठीक एक महीने के भीतर जो उत्तर न देगी तो कभी तेरे प्राण न बचेंगे।

विचक्षणा के प्राण उस समय तो बचगए, परन्तु महीने के ५ जितने दिन बीतते थे, मारे चिन्ता के वह मरी जाती थी। कुछ सोच विचार कर वह एक दिन कुछ खाने पीने की सामग्री लेकर शकटार के पास गई और रो रो कर अपनी सब विपत्ति कहने लगी। मत्री ने कुछ देर तक सोच कर उस अवसर की सब घटना पूछी और हस कर कहा— 'मै १० जान गया राजा क्यों हसे थे। कुल्ला करने के समय पानी के छोटे छीटों पर राजा को वटबीज की याद आई, और यह भी ध्यान हुआ कि ऐसे बड़े बड़ के वृक्ष इन्ही छोटे बीजों के अन्तर्गत है। किन्तु भूमि पर पडते ही वह जल के छींटे नाश हो गए। राजा अपनी इसी भावना को याद कर १५ के हसते थे।' विचक्षणा ने हाथ जोड कर कहा— "यदि आप के अनुमान से मेरे प्राण की रक्षा होगी तो मै जिस तरह से होगा, आप को कैदखाने से छुड़ाऊगी और जन्म भर आप की दासी हो कर रहूंगी।"

राजा ने विचक्षणा से एक दिन फिर हसने का कारण २० पूछा, तो विचक्षणा ने शकटार से जैसा सुना था कह सुनाया। राजा ने चमत्कृत हो कर पूछा— "सच बता, तुझ से यह भेद किस ने कहा?" दासी ने शकटार का सब वृत्त कहा और राजा को शकटार की बुद्धि की प्रशंसा करते देख अवसर पाकर उस के मुक्त होने की प्रार्थना भी २५ की। राजा ने शकटार को बन्दी से छुडा कर राक्षस के नीचे मन्त्री बना कर रक्खा।

ऐसे अवसर पर राजा लोग बहुत चूक जाते हैं।