मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)
Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary
दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा
DevanagariHindipublished207 पृष्ठ
पृष्ठ 128, कुल 207 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 128
विवाहप्रकरण ११९ है । उदाहरण—मेष राशि में पहला द्रेष्काण मंगल का, दूसरा सूर्य का और तीसरा द्रेष्काण बृहस्पति का होता है ॥ ३९ ॥ द्रेष्काण चक्र
| अंश | मे० | वृ० | मि० | क० | सिंह | कं० | तु० | वृ० | ध० | म० | कुं० | मी० |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| १० | मं० | शु० | बु० | च० | सू० | बु० | शु० | मं० | बृ० | श० | श० | बृ० |
| २० | सू० | बु० | शु० | मं० | बृ० | श० | श० | बृ० | मं० | शु० | बु० | चं० |
| ३० | बृ० | श० | श० | बृ० | मं० | शु० | बु० | चं० | सू० | बु० | शु० | मं० |
| द्वादशांश विधि | ||||||||||||
| स्याद्द्वादशंश इह राशित एव गेहं | ||||||||||||
| होराथ दृक्कनवमांशकसूर्यभागाः । | ||||||||||||
| त्रिंशांशकश्च षडिमे कथितास्तु वर्गाः | ||||||||||||
| सौम्यैः शुभं भवति चाशुभमेव पापैः ॥ ४० ॥ | ||||||||||||
| अन्वयः—इह राशितः एव द्वादशांशः (स्यात्) अथ गेहं, होरा दृक्कनवमांशकसूर्य- | ||||||||||||
| भागाः च त्रिंशांशकः इमे षड्वर्गाः कथिताः, (तत्र) सौम्यैः (षड्वर्गेः) शुभ पापैः च | ||||||||||||
| अशुभं (फलं) भवति ॥ ४० ॥ | ||||||||||||
| दो अंश तीस कलाओं का एक द्वादशांश होता है । एक राशि में बारह | ||||||||||||
| द्वादशांश होते हैं। उनका यह क्रम है कि जिस राशि में द्वादशांशों का | ||||||||||||
| विचार करना हो उसी राशि से लेकर क्रम से बारह राशियों के द्वादशांश | ||||||||||||
| होते हैं। यथा मेष राशि में पहिला द्वादशांश मेष ही का, दूसरा वृष | ||||||||||||
| का, तीसरा मिथुन का, चौथा कर्क का, पाँचवाँ सूर्य का, छठा कन्या | ||||||||||||
| का, सातवाँ तुला का, आठवाँ वृश्चिक का, नवाँ धनु का, दशवाँ मकर | ||||||||||||
| का, गेरहवाँ कुम्भ का और बारहवाँ मीन का द्वादशांश होता है । | ||||||||||||
| ऐसे ही वृष राशि में पहिला द्वादशांश वृष का और दूसरा मिथुन का | ||||||||||||
| इत्यादि । |