भारतकोश
मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary

दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा

DevanagariHindipublished207 पृष्ठ

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१३२ मुहूर्त्तचिन्तामणि कि सूर्य जिस नक्षत्र में स्थित हो उस नक्षत्र से लेकर श्लेषा, मघा, रेवती, चित्रा, अनुराधा, श्रवण इन नक्षत्रों तक गिनने से जितनी संख्या हो अश्विनी को लेकर उतनी ही संख्यावाला दिन नक्षत्र पातदोष से दूषित होता है । उदाहरण—यथा ज्येष्ठा में सूर्य है उससे लेकर श्रवण नक्षत्र तक गिनने से पाँच संख्या हुई। अब अश्विनी से पाँचवाँ मृगशिरा नक्षत्र हुआ । यही पात- दूषित हुआ । ऐसे ही और भी जानना चाहिए ॥ ६० ॥ क्रान्तिसाम्य योग पञ्चास्याजौ गोमृगौ तौलिकुम्भौ कन्यामीनौ कर्क्सली चापयुग्मे । तत्रान्योऽन्यं चन्द्रभान्वोनिरुक्तं क्रान्तेः साम्यं नो शुभं मङ्गलेषु ॥ ६१ ॥ अन्वयः—पञ्चास्याजौ, गोमृगौ, तौलिकुम्भौ, कन्यामीनौ, कर्क्सली, चापयुग्मे तत्र अन्योऽन्यं (स्थितयोः) चन्द्रभान्वोः क्रान्तेः साम्यं निरुक्तं (तत्) मंगलेषु नो शुभं स्यात् ॥ ६१ ॥ सिंह और मेष इन दोनों में से किसी एक में चन्द्रमा और दूसरे में सूर्य स्थित हो तो क्रान्तिसाम्य योग होता है । ऐसे ही वृष-मकर, तुला-कुम्भ, कन्या-मीन, कर्क-वृश्चिक और धनु-मिथुन, इन दो-दो राशियों में से किसी एक में सूर्य और दूसरी राशि में चन्द्रमा स्थित हो तो क्रान्तिसाम्य होता है । यह विवाहादि शुभ कार्यों में शुभ नहीं होता ॥ ६१ ॥ एकार्गल दोष व्याघातगण्डव्यतिपातपूर्वशूलान्त्यवज्रे परिघातिगण्डे । योगे विरुद्धे त्वभिजित्समेतः खार्जूरमर्काद्विषमे शशी चेत् ॥ ६२ ॥ अन्वयः—व्याघातगण्डव्यतिपातपूर्वशूलान्त्यवज्रे परिघातिगण्डे (अस्मिन्) विरुद्धे योगे चेत् (यदि) अभिजित्समेतः शशी अर्कात् विषमे (स्थितः) (तदा) खार्जूरं स्यात् ॥ ६२ ॥ जिस दिन व्याघात, गंड, व्यतीपात, विष्कुम्भ, शूल, वैधृति, वज्र, परिघ, अतिगंड इन योगों में से कोई योग हो और जिस नक्षत्र में सूर्य स्थित हो उस नक्षत्र से लेकर विषम नक्षत्र में चन्द्रमा स्थित हो उस दिन खार्जूर दोष होता है । यहाँ सम-विषम की गणना में अभिजित् का भी ग्रहण है । यह योग विवाहादि शुभ कार्यों में निन्दित होता है । उदाहरण— यथा द्वादशी, रविवार और मूल नक्षत्र व्याघात, योग है, और सूर्य