भारतकोश
मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary

दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा

DevanagariHindipublished207 पृष्ठ

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दि? It is पंग्वादि`.

Let's check line 20: पङ्गवंगे निखिलधनानि नाशमापुः सर्वत्राधिपगुरुदृष्टिभिर्न दोषः ।। ८३ ।। Wait, is there a space between नाशम् and आपुः? In line 20: नाशमापुः (single word, sandhi: नाशम् + आपुः = नाशमापुः). In line 22 (अन्वयः): नाशं आपुः । (two words). In line 20: सर्वत्राधिपगुरुदृष्टिभिर्न दोषः ।। ८३ ।। In line 22: सर्वत्र अधिपगुरुदृष्टिभिः न दोषः

Let's check line 22: लग्ने शिशुमरणम्, पग्वंगे निखिलधनानि नाशं आपुः । सर्वत्र अधिपगुरुदृष्टिभिः न दोषः Wait, in line 22: पग्वंगे vs पङ्गवंगे: it clearly is पग्वंगे.

Line 24: बहिरी लग्न में यदि विवाह हो तो दारिद्र्य होता है, जो लग्नें दिन में Wait, look at यदि in line 24: Is that dot an anusvara or a bindi? It says यदिं or यदि? It's यदिं. Let's write `