भारतकोश
मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary

दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा

DevanagariHindipublished207 पृष्ठ

पृष्ठ 154, कुल 207 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 154

विवाहप्रकरण १८४ शुभ नवांश कार्मुकतौलिककन्यायुग्मलवे झषगे वा। र्यहि भवेदुपयामस्तर्हि सती खलु कन्या ॥ ८४ ॥ अन्वयः—कार्मुकतौलिककन्यायुग्मलवे वा झषगे (लवे) र्यहि उपयामः भवेत् तर्हि (सा) कन्या खलु [निश्चयेन] सती (स्यात्) ॥ ८४ ॥ धनु, तुला, कन्या और मिथुन के नवांश में यदि विवाह हो तो कन्या पतिव्रता होती है। ग्रन्थकार ने मीन का नवांश भी विकल्प से शुभ बताया है, किन्तु प्राचीन मुनियों ने मीन का नवांश त्याज्य कहा है ॥ ८४ ॥ विहित नवांशों में भी किसी का निषेध अन्त्यनवांशे न च परिणेया काचन वर्गोत्तममिह हित्वा । नो चरलग्ने चरलवयोगं तौलिमृगस्थे शशभृति कुर्यात् ॥ ८५ ॥ अन्वयः—इह वर्गोत्तमं हित्वा अन्त्यनवांशे काचन (कन्या) न च परिणेया, तौलमृगस्थे शशभृति चरल