भारतकोश
मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary

दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा

DevanagariHindipublished207 पृष्ठ

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विवाहप्रकरण १५५ जोड़कर उसमें साठ का भाग देने से लब्ध हुए इष्टकालिक दण्ड पल होते हैं। उदाहरण—यथा शाके १८१४ माघ कृष्ण दशमी बृहस्पतिवार को २५ दण्ड ६ पल तात्कालिक सूर्य के ९। ३। १३। ०० स्पष्ट में अयनांश जोड़ने से ९। २६। ३। ०० यह सूर्य का सायन स्पष्ट हुआ। इसके २६। ३। ०० अंशादि को ३० अंशों में घटाने पर शेष ३। ५७। ०० सूर्य के भोग्य अंशादि हुए। मकरराशि में रहने के कारण सूर्य के ३। ५७। ०० भोग्य अंशों से लखनऊ की ३०३ पलात्मक मकरोदय प्रमाण को गुणने पर ११९६। ५१। ०० पलादि हुए। इनमें ३० तीस का भाग देने से ३९। ५३ लब्ध सायन सूर्य के भोग्य पलादि हुए। ऐसे ही तात्कालिक २। २६। ४०। ०० लग्न में २२। ५० अयनांश जोड़ने से ३। १९। ३०। ०० सायन लग्न हुई। कर्कराशि होने के कारण इसके १९। ३०। ०० भुक्तांशों से लखनऊ की पलात्मक ३४३ कर्कोदय प्रमाण को गुणने से ६६८८। ३०। ०० पलादि हुए। इनमें ३० का भाग देने से २२२। ५७ लब्ध सायन लग्न के भुक्त पलादि हुए। सूर्य के ३९। ५३ भोग्य और लग्न के २२२। ५७ भुक्त पलों को तथा मकर और कर्क के मध्य की कुम्भ के २५१, मीन के २१८, मेष के २१८, वृष के २५१, मिथुन के ३०३ पलात्मक प्रमाणों को जोड़ने से १५०४ पल हुए। इनमें साठ का भाग देने से २५। ४ लब्ध इष्ट दण्ड हुए। वहाँ सूर्यादि प्रतिविकलादि छूटने के कारण इष्ट में दो पलों का भेद हुआ है ॥ १०५॥ लखनऊ का लग्नमान

मेषवृषमिथुनकर्कसिंहकन्यातुलावृश्चिकधनुमकरकुम्भमीन
२१८२५१३०३३४३३४७३३८३३८३४७३४३३०३२५१२१८
इष्टकाल बनाने की विशेष रीति
चेल्लग्नाकौ सायनावेकराशौ तद्विश्लेषघ्नोदयः खाग्निभक्तः ।
स्वेष्टः कालो लग्नमूनं यदार्काद्राशौ शेषोऽर्कात्सषड्भं निशायाम् ॥ १०६॥
अन्वयः—चेत् सायनौ लग्नाकौ एकराशौ (तदा) तद्विश्लेषघ्नोदयः खाग्निभक्तः
स्वेष्टः कालः (स्यात्), यदा लग्नं अर्कात् ऊनं (तदा) रात्रेः शेषः स्यात् तथा, निशायां
सषड्भात् अर्कात् ॥ १०६॥