भारतकोश
मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary

दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा

DevanagariHindipublished207 पृष्ठ

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विवाहप्रकरण १५७ बाणोपग्रहपापकर्त्तरि तथा तिथ्यर्क्षयोगोत्थितं दुष्टं योगमथार्द्धयामकुलिकाद्यान्वारदोषानपि ॥ १०८ ॥ क्रूराक्रान्तविमुक्तभं ग्रहणभं यत्क्रूरगन्तव्यभं त्रेधोत्पातहतं च केतुहतभं सन्ध्योदितं भं तथा । तद्वच्च ग्रहभिन्नयुद्धगतभं सर्वानिमान्संत्यजे- दुद्वाहे शुभकर्मसु ग्रहकृतान् लग्नस्य दोषानपि ॥ १०९ ॥ अन्वय:—पातदग्धतिथिभिः सह उत्पातान्, तथा दुष्टान् योगान् अथ चन्द्रे- ज्योशनसां अस्तमयनं तथा तिथ्याः क्षयवृद्धी, च सविष्टिसंक्रमदिनं, गण्डान्तं, तथा तन्वंशपास्तं, अथ तन्वंशेशविधून् तथा अष्टरिपुगान् पापस्य वर्गान् सेन्दुक्रूरखगोदयांशं उदयास्तशुद्धिश्चण्डायुधान्, दशयोगयोगसहितं खार्जूरं जामित्रलत्ताव्यधम्, तथा बाणोप- ग्रहपापकर्त्तरि, तिथ्यर्क्षयोगोत्थितं दुष्टं योगं अथ अर्धयामकुलिकाद्यान् वारदोषान् अपि [तथा] क्रूराक्रान्तविमुक्तभं, ग्रहणभं, तथा यत् क्रूरगन्तव्यभं, त्रेधोत्पातहतं च पुनः केतुहतभं तथा सन्ध्योदितं भं च (पुनः) तद्वत् ग्रहभिन्नयुद्धगतभं, ग्रहकृतान् लग्नस्य दोषान् अपि इमान् सर्वान् उद्वाहे शुभकर्मसु सन्त्यजेत् ॥ १०७-१०६ ॥ दिग्दाह प्रसिद्ध वृक्ष या मकान आदि का अकस्मात् गिरना, पानी का बरसना, उल्कापात, बड़ी आँधी का आना, बिजली का गिरना, बिना मेघ का गरजना, भूकम्प आना, चन्द्र-सूर्य में मण्डल होना, सियारी का चिल्लाना, और भी ग्रामसम्बन्धी उत्पात तथा क्रान्तिसाम्य, दग्धातिथि, व्यतीपात, वैधृति इत्यादि दुष्टयोग, चन्द्र, शुक्र, बृहस्पति का अस्त, दक्षि- णायन, तिथि की हानि-वृद्धि, नक्षत्र, तिथि, लग्न के गण्डान्त, भद्रा, संक्रान्ति दिन, लग्न और नवांश के स्वामी का अस्त, लग्न से आठवें वा छठे स्थान में स्थित लग्न वा नवांश का स्वामी, लग्न में पापग्रहों के गृह, होरा, द्रेष्काण, नवांश, द्वादशांश, त्रिंशांश, चन्द्रमा वा क्रूरग्रह से युक्त लग्न वा नवांश, लग्नशुद्धि, सातवें स्थान की शुद्धि, पात और खर्जूर दोष, दशयोगों के सहित जामित्र वा लत्तादोष, वेध दोष, बाणदोष, उपग्रह- दोष, पापकर्त्तरीदोष तथा तिथि-नक्षत्र से, तिथि-वार से, नक्षत्र-वार से, वा तिथि-नक्षत्र-वार से उत्पन्न दुष्योग, अर्द्धयाम, कुलिकादि वारदोष, क्रूरग्रहयुक्त नक्षत्र, क्रूरग्रह का भोग किया नक्षत्र, जिसमें क्रूरग्रह आनेवाला हो या सूर्य-चन्द्रग्रहण हुआ हो वह नक्षत्र, जिसमें पूर्वोक्त उत्पात हुए हों या केतु का उदय हुआ हो वह नक्षत्र, सूर्य के अस्तकाल में प्रारम्भ होनेवाला, अर्थात् सूर्य के नक्षत्र से चौदहवाँ नक्षत्र, जिसमें ग्रहों का युद्ध हुआ