मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)
Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary
दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१५८ मुहूर्त्तचिन्तामणि हो वह नक्षत्र और लग्न के दोष इन सबका विवाहादि सम्पूर्ण शुभ कार्यों में त्याग करे ॥ १०७-१०९ ॥ कन्यादि के तेल आदि लगाने की संख्या मेषादिराशिशजवधूवरयोर्वटोश्च तैलादिलापनविधौ कथितात्र संख्या । शैला दिशः शरदिगक्षनगाद्रिबाणबाणाक्षबाणगिरयो ७।१०।५ १०। ५ । ७ । ७ । ५ । ५ । ५ । ५ । ७ विबुधैस्तु कश्चित् ॥ ११० ॥ इति मुहूर्त्तचिन्तामणौ विवाहप्रकरणं समाप्त ॥ ६ ॥ अन्वयः—अत्र मेषादिराशिशजवधूवरयोः वटोः (बालकस्य) च तैलादिलापनविधौ कैश्चित् विबुधैः (क्रमेण) शैलाः दिशः शरदिगक्षनगाद्रिबाणबाणाक्षबाणगिरयः (इति) संख्या कथिता ॥ ११० ॥ मेषादि राशियों में उत्पन्न कन्या, वर और जिसका यज्ञोपवीत होनेवाला हो उसके तेल-उबटन आदि लगाने में कुछ पण्डितों ने ७।१०।५।१०।५।७।७।५। ५।५।५।७ यह संख्या कही है, अर्थात् मेष राशिवालों को विवाह और यज्ञो- पवीत दिन से पूर्व सात दिन, वृष राशिवालों को दश दिन, मिथुन राशि- वालों को पाँच दिन, कर्क राशिवालों को दश दिन, सिंह राशिवालों को पाँच दिन, कन्या राशिवालों को सात दिन, तुला राशिवालों को सात दिन, वृश्चिक राशिवालों को पाँच दिन, धनु राशिवालों को पाँच दिन, मकर राशि- वालों को पाँच दिन, कुम्भ राशिवालों को पाँच दिन, मीन राशिवालों को सात दिन तेल और उबटन लगाना चाहिए ॥ ११० ॥ वधूप्रवेशप्रकरण —:०:— समाद्रिपञ्चाङ्कदिने विवाहाद्वधूप्रवेशोऽष्टदिनान्तराले । शुभः परस्ताद्विषमाब्दमासदिनेऽक्षवर्षात्परतो यथेष्टम् ॥ १ ॥ अन्वयः—विवाहात् अष्टदिनान्तराले समाद्रिपञ्चाङ्कदिने वधूप्रवेशः शुभः स्यात्, परस्तात् [षोडशदिनेभ्यः पश्चात्] विषमाब्दमासदिने शुभः स्यात्, अथ अक्षवर्षात् परतः यथेष्टम् [यदा कदाचित् शुभदिने] वधूप्रवेशः शुभः (स्यात्) ॥ १ ॥ विवाह के दिन से सोलह दिन के भीतर सम अर्थात् दूसरे, चौथे, छठे, आठवें, दशवें, बारहवें, चौदहवें तथा सातवें, पाँचवें, नवें दिन में और सोलह