भारतकोश
मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary

दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा

DevanagariHindipublished207 पृष्ठ

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४४ मुहूर्त्तचिन्तामणि नवान्नभक्षणमुहूर्त्त नवान्नं स्याच्चरक्षिप्रमृदुभे सत्त नौ शुभम् । विना नन्दाविषघटीमधुपौषार्किभूमिजान् ॥ ३७ ॥ अन्वयः—चरक्षिप्रमृदुभे, सत्त नौ, नन्दाविषघटीमधुपौषार्किभूमिजान् विना नवान्नं (शुभं) स्यात् ॥ ३७ ॥ श्रवण, धनिष्ठा, शतभिष, पुनर्वसु, स्वाती, अश्विनी, पुष्य, हस्त, चित्रा, अनुराधा, मृगशिरा और रेवती नक्षत्र में शुभग्रहों से युक्त वा दृष्ट शुभग्रहों के लग्न में, परीवा, छठि, एकादशी तिथि, विषघटी, पूस और चैत्रमास, मङ्गल और शनैश्चर दिन को छोड़ अन्य तिथि, वार और मास में नवान्न- भक्षण शुभ है ॥ ३७ ॥ नौकाघट्टनमुहूर्त्त याम्यत्रयविशाखेन्द्रसार्पपित्र्येशभिन्नभे । भृग्विज्यार्कदिने नौकाघट्टनं सत्त नौ शुभम् ॥ ३८ ॥ अन्वयः—याम्यत्रयविशाखेन्द्रसार्पपित्र्येशभिन्नभे, भृग्वीज्यार्कदिने सत्त नौ नौकाघट्टनं शुभम् ॥ ३८ ॥ भरणी, कृत्तिका, रोहिणी, विशाखा, ज्येष्ठा, आश्लेषा, मघा, आर्द्रा को छोड़ अन्य नक्षत्रों में; शुक्र, बृहस्पति और रविवार में तथा शुभग्रहयुक्त वा दृष्ट शुभ लग्न¹ में नाव का बनवाना शुभ होता है ॥ ३८ ॥ वीरसाधन व अभिचार का मुहूर्त्त मूलाद्रार्भरणीपित्र्यमृगे सौम्ये घटे तनौ । सुखे शुक्रेऽष्टमे शुद्धे सिद्धिवीराभिचारयोः ॥ ३९ ॥ अन्वयः—मूलाद्रार्भरणीपित्र्यमृगे, घटे तनौ सौम्ये, शुक्रे सुखे, अष्टमे शुद्धे वीराभि- चारयोः सिद्धिः (भवति) ॥ ३६ ॥ मूल, आर्द्रा, भरणी, मघा और मृगशिरा नक्षत्र में; बुधयुक्त कुम्भ लग्न में; लग्न से चौथे स्थान में शुक्र के रहते और आठवें स्थान में किसी ग्रह के न रहते वीरसाधन और अभिचार करना सिद्धिकारक होता है ॥ ३९ ॥ रोग शान्त होने के पश्चात् स्नान का मुहूर्त्त व्यन्त्यादितिध्रुवमघानिलसार्पधिष्ण्ये रिक्ते तिथौ चरतनौ विकवीन्दुवारे । १—विवाहप्रकरण में कहेंगे ।