भारतकोश
मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary

दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा

DevanagariHindipublished207 पृष्ठ

पृष्ठ 64, कुल 207 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 64

संक्रान्तिप्रकरण ५५ संक्रान्तिचक्र

घोराध्वांक्षीमहोदरीमन्दाकिनीमन्दामिश्राराक्षसी
सूर्यसोममंगलबुधबृहस्पतिशुक्रशनैश्चर
पू० ३<br>भरणी<br><br>मघाहस्त<br>अश्विनी<br>पुष्य<br>अभिजित्स्वाती<br>पुनर्वसु<br>श्रवण<br>धनिष्ठा<br>शतभिषमृगशिरा<br>रेवती<br>चित्रा<br>अनुराधाउत्तरा ३<br>रोहिणीविशाखा<br>कृत्तिकामूल ज्येष्ठा<br>आर्द्रा<br>आश्लेषा
शूद्र<br>सुखदावैश्य<br>सुखदाचोर सुखदाक्षत्रिय<br>सुखदाब्राह्मण<br>सुखदापशु<br>सुखदाचांडालादि<br>सुखदा
दिन-रात्रि के विभाग से संक्रान्तियों का शुभाशुभ फल
त्र्यंशे दिनस्य नृपतीन्प्रथमे निहन्ति
मध्ये द्विजानपि विशोऽपरके च शूद्रान् ॥ २ ॥
अस्ते निशाप्रहरकेषु पिशाचका-
दीन्नक्तंचरानपि नटान् पशुपालकांश्च ।
सूर्योदये सकललिङ्गिजनं च सौम्य
याम्ययनं मकरकर्कटयोर्निरुक्तम् ॥ ३ ॥
**अन्वयः—**दिनस्य प्रथमे त्र्यंशे (अर्कसंक्रमणं) नृपतीन् निहन्ति, मध्ये (त्र्यंशे)
द्विजान्, अपरके (त्र्यंशे) विशः, अस्ते शूद्रान् । निशाप्रहरकेषु (क्रमेण) पिशाचकादीन्,
नक्तंचरान्, नटान् अपि, पशुपालकान् च निहन्ति, सूर्योदये (अर्कसंक्रान्तिः) सकललिङ्गि-
जनं निहन्ति । मकरकर्कटयोः (क्रमेण) सौम्ययाम्ययानम् निरुक्तम् ॥ २-३ ॥
दिनमान के तीन भाग करके यह विचार करना चाहिए कि प्रथमभाग
में सूर्यसंक्रान्ति हो तो क्षत्रियों का, दूसरे भाग में हो तो ब्राह्मणों का, तीसरे
भाग में हो तो वैश्यों का और सूर्यास्तकाल में हो तो शूद्रों का नाश करती
है । रात्रि के पहले पहर में संक्रान्ति हो तो पिशाचों और भूतों का, दूसरे
पहर में हो तो राक्षसों का, तीसरे पहर में हो तो नटों का चौथे पहर में
पशुपालकों अर्थात् अहीरों का और सूर्योदय काल में पाखण्डियों का नाश
मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक) · पृष्ठ 64, कुल 207 में से · BharatKosha