मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)
Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary
दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा
DevanagariHindipublished207 पृष्ठ
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संक्रान्तिप्रकरण ५५ संक्रान्तिचक्र
| घोरा | ध्वांक्षी | महोदरी | मन्दाकिनी | मन्दा | मिश्रा | राक्षसी |
|---|---|---|---|---|---|---|
| सूर्य | सोम | मंगल | बुध | बृहस्पति | शुक्र | शनैश्चर |
| पू० ३<br>भरणी<br><br>मघा | हस्त<br>अश्विनी<br>पुष्य<br>अभिजित् | स्वाती<br>पुनर्वसु<br>श्रवण<br>धनिष्ठा<br>शतभिष | मृगशिरा<br>रेवती<br>चित्रा<br>अनुराधा | उत्तरा ३<br>रोहिणी | विशाखा<br>कृत्तिका | मूल ज्येष्ठा<br>आर्द्रा<br>आश्लेषा |
| शूद्र<br>सुखदा | वैश्य<br>सुखदा | चोर सुखदा | क्षत्रिय<br>सुखदा | ब्राह्मण<br>सुखदा | पशु<br>सुखदा | चांडालादि<br>सुखदा |
| दिन-रात्रि के विभाग से संक्रान्तियों का शुभाशुभ फल | ||||||
| त्र्यंशे दिनस्य नृपतीन्प्रथमे निहन्ति | ||||||
| मध्ये द्विजानपि विशोऽपरके च शूद्रान् ॥ २ ॥ | ||||||
| अस्ते निशाप्रहरकेषु पिशाचका- | ||||||
| दीन्नक्तंचरानपि नटान् पशुपालकांश्च । | ||||||
| सूर्योदये सकललिङ्गिजनं च सौम्य | ||||||
| याम्ययनं मकरकर्कटयोर्निरुक्तम् ॥ ३ ॥ | ||||||
| **अन्वयः—**दिनस्य प्रथमे त्र्यंशे (अर्कसंक्रमणं) नृपतीन् निहन्ति, मध्ये (त्र्यंशे) | ||||||
| द्विजान्, अपरके (त्र्यंशे) विशः, अस्ते शूद्रान् । निशाप्रहरकेषु (क्रमेण) पिशाचकादीन्, | ||||||
| नक्तंचरान्, नटान् अपि, पशुपालकान् च निहन्ति, सूर्योदये (अर्कसंक्रान्तिः) सकललिङ्गि- | ||||||
| जनं निहन्ति । मकरकर्कटयोः (क्रमेण) सौम्ययाम्ययानम् निरुक्तम् ॥ २-३ ॥ | ||||||
| दिनमान के तीन भाग करके यह विचार करना चाहिए कि प्रथमभाग | ||||||
| में सूर्यसंक्रान्ति हो तो क्षत्रियों का, दूसरे भाग में हो तो ब्राह्मणों का, तीसरे | ||||||
| भाग में हो तो वैश्यों का और सूर्यास्तकाल में हो तो शूद्रों का नाश करती | ||||||
| है । रात्रि के पहले पहर में संक्रान्ति हो तो पिशाचों और भूतों का, दूसरे | ||||||
| पहर में हो तो राक्षसों का, तीसरे पहर में हो तो नटों का चौथे पहर में | ||||||
| पशुपालकों अर्थात् अहीरों का और सूर्योदय काल में पाखण्डियों का नाश |