भारतकोश
मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary

दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा

DevanagariHindipublished207 पृष्ठ

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५४ मुहूर्त्तचिन्तामणि संक्रान्तिप्रकरण ——————:०:—————— दिन और नक्षत्र के भेद से संक्रान्तियों के नाम और फल घोरार्कसंक्रमणमुग्ररवौ हि शूद्रान् ध्वाङ्क्षी विशो लघुविधौ च चरर्क्षभौमे । चौरान् महोदरयुता नृपतीन् ज्ञमैत्रे मन्दाकिनी स्थिरगुरौ सुखयेच्च मन्दा ॥ १ ॥ विप्रांश्च मिश्रभभृगौ तु पशूंश्च मिश्रा तीक्ष्णार्कजेऽन्त्यजसुखा खलु राक्षसी च । अन्वयः—[यदि] उग्ररवौ अर्कसंक्रमणं (स्यात्) (तदा) घोरा (नाम्नीसंक्रान्तिः) (सा) शूद्रान् सुखयेत्, लघुविधौ ध्वाङ्क्षी [सा] विशः, च (पुनः) चरर्क्षभौमे महोदर- युता (संक्रान्तिः) (सा) चौरान्, ज्ञमैत्रे मन्दाकिनी (सा) नृपतीन्, स्थिरगुरौ मन्दा (सा) विप्रान्, तु (पुनः) मिश्रभभृगौ मिश्रा (सा) पशून् सुखयेत्, तीक्ष्णार्कजे राक्षसी (सा) अन्त्यजसुखा (स्यात्) ॥ १ ॥ तीनों पूर्वा, भरणी या मघा नक्षत्र में रविवार को जो सूर्य की संक्रान्ति होती है, उसका घोरा नाम होता है। वह शूद्रों को सुख देती है। हस्त, अश्विनी, पुष्य या अभिजित् नक्षत्र में सोमवार को जो संक्रान्ति होती है, उसका नाम ध्वांक्षी होता है। वह वैश्यों को सुख देती है। स्वाती, पुनर्वसु, श्रवण, धनिष्ठा वा शतभिष नक्षत्र में मंगलवार को जो संक्रान्ति होती है, उसका महोदरी नाम होता है। वह चोरों को सुख देती है। मृगशिरा, रेवती, चित्रा वा अनुराधा नक्षत्र में बुधवार को जो संक्रान्ति होती है, उसका मन्दाकिनी नाम होता है। वह क्षत्रियों को सुख देती है। तीनों उत्तरा वा रोहिणी नक्षत्र में बृहस्पति के दिन जो सक्रान्ति होती है, उसका मन्दा नाम होता है। वह ब्राह्मणों को सुख देती है ॥ १ ॥ विशाखा अथवा कृत्तिका नक्षत्र में शुक्रवार को जो संक्रान्ति होती है, उसका मिश्रा नाम होता है। वह पशुओं को सुख देती है। मूल, ज्येष्ठा, आर्द्रा या आश्लेषा नक्षत्र में शनैश्चर को जो संक्रान्ति होती है, उसका राक्षसी नाम होता है। वह चाण्डालादि को सुख देती है।