मुकुन्दमाला स्तोत्रम् (कुलशेखर आलवार - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)
Mukundamala Stotram of Kulasekhara Alwar with Commentary
कुलशेखर आलवार (राजा कुलशेखर) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें94 मुकुन्दमाल ते.गी. देवदेवुनिఁ जिंतिंचु दिनमु दिनमु चक्रहस्तुनिఁ ब्रकटिंचु चदुवु चदुवु कुंभिनीधवुఁ जेप्पेडि गुरुఁडु गुरुఁडु तंड्रि! हरिఁ जेरु मनियेडि तंड्रि तंड्रि. भागवतमु पंचमस्कंधमुन ॠषभुदु पुत्त्रुलकि ट्लुपदेशिं चेनु. मृत्युरूपसंसारमुन बडि अल्लाडुचुंडु वानिनि लेवनेत्तलेनि गुरुडु गुरुडु कादु. शिष्यवित्तापहारुडु गुरुडु कादु. हृत्तापहो- रुडे गुरुडनबडुनु. भगवद्विषयमुन जेर्चनि तंड्रि तंड्रि कादु. तल्लि तल्लि कादु. मनोवृत्तिनि शुद्धिचेसि भगवद्भागवत भक्ति कल्पिंचु दैवमे दैवमु. भगवद्विषयमुन संबंधपरचु भर्तये भर्त. इत्लु चेयनि वाडु विटुडु, जारुडु. कనుకने कुलशेखरुलु आ या कार्यमुलु चेसि आ यापेर्लनु पोंदुडनि इंद्रियमुलकु बोधिंचि प्रार्थिंचिरि. 17 हे लोका श्शृणुत प्रसूति मरणव्याधेश्चिकित्सा मिमां योगज्ञा स्समुदाहरन्ति मुनयो यां याज्ञवल्क्यादयः, अन्तर्ज्योति रमेय मेक ममౄतं कृष्णाख्य माप्रीयतां तत्पीतं परमौषधं वितनुते निर्वाण मात्यन्तिकम्. हे लोकाः=ओ जनुलारा, इमां=नेनु चेप्पबोवुचुन्नट्टि, प्रसूति मरण व्याधेः=चावु पुट्टुक लनेडु रोगमुनकु, चिकित्सां=मन्दुन्, शृणुत=विनुडु, यां=ए यौषधमुनु, योगज्ञाः=योग शास्त्रमु नेఱिंगिनट्टि, याज्ञवल्क्यादयः=याज्ञवल्क्यमहामुनि मोदलुगा गल वारैन, मुनयः=ऋषुलु, समुदाहरन्ति=चेप्पुचुन्नारो, अन्तः ज्योतिः=लोपलने वेलुतुरु गलदियु-स्वयं प्रकाशमैनदियु, अमेयं=लेक्क पेट्टदगनिदियुनगु, कृष्णाख्यं=श्रीकृष्णमूर्ति यनुपे रुगल, अमृतं एकं=अमृत मोक्कटे, आपीयतां=त्रागबडुनु गाक, पीतं=पानमु चेयबडिन, तत्=आ, परमौषधं=मुख्यमैन