मुकुन्दमाला स्तोत्रम् (कुलशेखर आलवार - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)
Mukundamala Stotram of Kulasekhara Alwar with Commentary
कुलशेखर आलवार (राजा कुलशेखर) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमुकुन्दमाल 97 कुल : इदि आ मंदुलवंटिदि कादु. इदि ओके मंदु. दीनिनि पुच्चुकोनिन पिदप वेरॊक्कदानिनि पुच्चुकोनव लसियुंडदु. जनुलु : दानि पेरेमि? कुल : आ मंदु कृष्णुडनु पेरुगलदि. जनुलु : गॊप्पमंदु. गॊप्पव्याधिनि कुदुर्चुनु. गॊप्पवारु कनिपॆट्टि नट्टिदि गॊप्पव्याधिनि पोगॊट्टुमंदु मिगुल चेदैयुंडुनु. देहपुष्टिकी तीसिकॊनु मंदु मधु रमूग नुंडुन ట్లుंडदु. ई मंदु चेदुग नुंडुना? कुल : ई मंदु अमृतमुगा नुंडुनु. लोपलिकि पोयि पनिचेयुनु. जनुलु : नमल वलसियुंडुना? कष्टमुग नुंडुना? कुल : नमलवलसिन पनिलेदु. पानमु चेयवच्चुनु. सुलभ मुगाने लोपलिकि पोवुनु. जनुलु : मिगुल मधुरमुग नुंडु औषधमु अंतगा पनिचे युदे? कुल : त्रागुवఱकु अमृतमुग नुंडुनु. लोपलिकि पोगाने औषध मगुनु. सकल रोगमुल बोगॊट्टि सुख मिच्चुनु. इतरौषध सेव चेयुचु अपथ्यमु चेसिरेनि व्याधि मरलं वच्चुनु. आ मंदुलु तात्कालमुनकु सुख मिच्चुनु. ई योषधमु शाश्वतसुख मिच्चुनु. मा मुपेत्य पुनर्जन्म दुःखालयमशाश्वतम्, नाप्नुवन्ति महात्मानः संसिद्धिं परमां गताः. -- गीत. 8.15