भारतकोश
मुकुन्दमाला स्तोत्रम् (कुलशेखर आलवार - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)

मुकुन्दमाला स्तोत्रम् (कुलशेखर आलवार - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)

Mukundamala Stotram of Kulasekhara Alwar with Commentary

कुलशेखर आलवार (राजा कुलशेखर) द्वारा

DevanagariHindipublished167 पृष्ठ

पृष्ठ 104, कुल 167 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 104

मुकुन्दमाल 97 कुल : इदि आ मंदुलवंटिदि कादु. इदि ओके मंदु. दीनिनि पुच्चुकोनिन पिदप वेरॊक्कदानिनि पुच्चुकोनव लसियुंडदु. जनुलु : दानि पेरेमि? कुल : आ मंदु कृष्णुडनु पेरुगलदि. जनुलु : गॊप्पमंदु. गॊप्पव्याधिनि कुदुर्चुनु. गॊप्पवारु कनिपॆट्टि नट्टिदि गॊप्पव्याधिनि पोगॊट्टुमंदु मिगुल चेदैयुंडुनु. देहपुष्टिकी तीसिकॊनु मंदु मधु रमूग नुंडुन ట్లుंडदु. ई मंदु चेदुग नुंडुना? कुल : ई मंदु अमृतमुगा नुंडुनु. लोपलिकि पोयि पनिचेयुनु. जनुलु : नमल वलसियुंडुना? कष्टमुग नुंडुना? कुल : नमलवलसिन पनिलेदु. पानमु चेयवच्चुनु. सुलभ मुगाने लोपलिकि पोवुनु. जनुलु : मिगुल मधुरमुग नुंडु औषधमु अंतगा पनिचे युदे? कुल : त्रागुवఱकु अमृतमुग नुंडुनु. लोपलिकि पोगाने औषध मगुनु. सकल रोगमुल बोगॊट्टि सुख मिच्चुनु. इतरौषध सेव चेयुचु अपथ्यमु चेसिरेनि व्याधि मरलं वच्चुनु. आ मंदुलु तात्कालमुनकु सुख मिच्चुनु. ई योषधमु शाश्वतसुख मिच्चुनु. मा मुपेत्य पुनर्जन्म दुःखालयमशाश्वतम्, नाप्नुवन्ति महात्मानः संसिद्धिं परमां गताः. -- गीत. 8.15