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मुकुन्दमाला स्तोत्रम् (कुलशेखर आलवार - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)

मुकुन्दमाला स्तोत्रम् (कुलशेखर आलवार - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)

Mukundamala Stotram of Kulasekhara Alwar with Commentary

कुलशेखर आलवार (राजा कुलशेखर) द्वारा

DevanagariHindipublished167 पृष्ठ

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कुल : स्वामी! नी गोप्पकु मेरलेदु. नीकंटेनु गोप्पयैनदि वेऱुग नेच्चटनु लेदु. नन्नु मोस पुच्चवलयुननि चूचुचुन्नावु. नेनु अन्निंटिनि जूचिये मी म्मांश्र यिञ्चितिनि. २०. बद्धेनाञ्जलिना नतेन शिरसा गात्रै स्स्रोमोद्गमैः कंठेना स्वरगद्गदेन नयने नोद्दीर्ण बाष्पांबुना, नित्यं त्वच्चरणारविन्दयुगळ ध्यानामृतास्वादिना मस्माकं सरसीरुहाक्ष सततं संपद्यतां जीवितम्. सरसीरुहाक्ष=ओ कमलमुलवंटि कन्नुलुगलवाडा! बद्धेन=कट्ट बडिन, अञ्जलिना=अञ्जलिचेतनु, नतेन=वंचबडिन, शिरसा=शिरस्सु चेतनु, सरोमोद्गमैः=गगुर्పాటుतो गूडिन, गात्रैः=करचरणाद्यवय वमुलचेतनु, स्वरगद्गदेन=गोंतु चप्पडुचेत कोतुकु पडुचुंडु, कंठेन=कंठमुचेतनु, उद्दीर्ण=बयटिकिवच्चुचुंडु, बाष्पांबुना=कन्नी रुगल, नयनेन=नेत्रमुल चेतनु, नित्यं=एल्लप्पुडु, त्वत्=नीयोक्क, चरणारविन्द=कमलमुलवंटि पादमुलयोक्क, युगळ=जंटयोक्क, ध्यान=चिंतसेयुटयुनु, अमृत=अमृतमुनु, आस्वादिनां=पान मुचेयुनट्टि, अस्माकं=माकु, सततं=एल्लप्पुडु, जीवितं=जीवनमु, संपद्यताम्=कडचिपोवुनुगाक! तामररेकुलवंटि कन्नुलु गलिगिन कृष्णा! अञ्जलिसेयु हस्त मुलतोडनु, वंगिन शिरस्सुतोडनु, गगुर्పాటుतो गूडिन गात्रमु तोडनु, डग्गुत्तिक गल कंठमुतोडनु, आनंदबाष्पमुलुगल कन्नुलतो डनु, नित्यमु नी चरण कमलध्यानमनेडि अमृतमुनु पानमु चेयुटयंदु माकु सदा जीवनमु कलगुगाक!

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