मुकुन्दमाला स्तोत्रम् (कुलशेखर आलवार - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)
Mukundamala Stotram of Kulasekhara Alwar with Commentary
कुलशेखर आलवार (राजा कुलशेखर) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें104 मुकुंदमाल स्वामि : नीवु बागुग परिशीलिंचि प्रपंचमु तुच्छमनि भाविंचि तिवि. नायंड जेरितिवि; संतोशमु. नीकेमि कावलेनु? कुलशेखरुलु : स्वामि! नाकेमियु वलसिनदि लेदु. स्वामि : अयिननु चेप्पुमु. कुल : ना चेतुलु इतर कार्यमुलनु जेयक नी कंजलि घटिंप वलयुनु. शिरमु वंगि युंडवलयुनु. भगवंतुनि सदा तलचुचुंडुटचेत शरीरमु रोमां चमुतो गूडिनदिग नुंडवलयुनु. अय्यो! यिन्नि दिनमुलु भगवंतुनि दलपकुंटिनिगदा यनि चिंतिं चुट चेत भयमु गलिगि मऱियुनु भगवद्भक्ति गलिगि अंदुचेत कंठमुन गद्गदस्वरमु कलगवलयुनु. भगवंतुनि दर्शितंचुट चेतनु, ध्यानिंचुटचेतनु कन्नुललो आनंदबाष्पमुलु कलगवलयुनु. सर्व कालमुल यंदुनु नीयोक्क चरणकमलद्वयमु योक्क ध्यानमु अनु नमृतमुनु पानमु चेय वलयुनु. ओ पुंडरीकाक्षा! मा की रीति जीवितमु जरुगवलयुनु. 21 हे गोपालक हे कृपाजलनिधे हे सिंधुकन्यापते हे कंसांतक हे गजेंद्रकरुणापारीण हे माधव हे रामानुज हे जगत्त्रयगुरो हे पुंडरीकाक्ष मां हे गोपीजननाथ पालय परं जानामि न त्वां विना. हे गोपालक=ओ पशुपुलनु पालिंचुवाडा (गोशब्दमुनकु भूमि यनियु नर्थमु), हे कृपाजलनिधे=दयकु समुद्र मयिनवाडा, हे सिंधुकन्यापते=समुद्रुनि कूतुरगु लक्ष्मीदेविकि प्रियुडा, हे