भारतकोश
मुकुन्दमाला स्तोत्रम् (कुलशेखर आलवार - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)

मुकुन्दमाला स्तोत्रम् (कुलशेखर आलवार - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)

Mukundamala Stotram of Kulasekhara Alwar with Commentary

कुलशेखर आलवार (राजा कुलशेखर) द्वारा

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दुष्टबुद्धिग नुण्डुट मिगुल हानिकरमु. तेल्लनि पदार्थमुनु चूडनि वानि कण्टेनु, चूचियु एऱ्ऱग नुन्नदि, नल्लग नुन्नदि यनि विपरीतमुग चेप्पुवाडु अविवेकि गदा! वानि कनुले चेडिनवनि येन्नवलसि युण्डुनु. तप्पुग तेलिसि कोनुवाडे दुर्मति. मूढुनिकि शरीरमु योक्य संग तिये तेलियदु. दुर्मति यन्ननो ई शरीरमु शाश्वतमुग नुण्डुननि विपरीतमुग दलंचुनु). इतरमुलैन मन्दुलनु पुच्चुकोनवलदु. प्रश्न : अटुलैन शरीरमुनु कापाडु कोनवलदा? उत्तरमु : वेऱु मन्दुलनु पुच्चुकोनु नेडल अवि शरीरमुनु गापाडुनु. आत्मनु चेरचुनु. कान वानि नेल तीसिकोनवलयुनु? प्रश्न : अटुलयिन नेट्लु? उत्तरमु : कृष्णरसायनमुनु पुच्चुकोनुमु. ई मन्दु अट्टिदि कादु. सकलरोगमुलनु पोगोट्टुनु. श्रीकृष्ण रसायन मनु मन्दु आरोग्य प्रदमुलैन अनेक मूलिकलु चेरि युण्डुटचेत नल्लग नुण्डुनु. (स्वामि नल्लनि वाडु) रसायनं -- रस=मोक्षमुनकु, अयनं=स्थानमु. मोक्षमुनकु स्थानमुग नुण्डु कृष्ण डनु औषध मुनु त्रागुमनि भावमु. ३२ दारा वाराकरवरसुता ते तनूजो विरिञ्चिः स्तोता वेद स्तव सुरगणो भृत्यवर्गः प्रसादः, मुक्तिर्माया जगदविकलं तावकी देवकी ते माता मित्रं बलरिपुसुत स्त्वय्यतोऽन्यन्न जाने. वाराकर वरसुता=समुद्रमुललो मेटियैन पालकडलि पट्टि लक्ष्मीदेवि, ते=नीयोक्य, दाराः=प्रियुरालु, विरिञ्चिः=ब्रह्मा, ते=