मुकुन्दमाला स्तोत्रम् (कुलशेखर आलवार - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)
Mukundamala Stotram of Kulasekhara Alwar with Commentary
कुलशेखर आलवार (राजा कुलशेखर) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमुकुन्दमाल 135 माट्लाडुवारु कारु .गान नित्यसूरुलुनु साक्षुलु. लक्ष्मीनारायणुलु चदरंग माडुट नितरुलु चूडवच्चुना यनिन वेदमुलनु स्त्रीलिं- गमुगनु, नित्यसूरुलनु नपुंसक लिंगमुगनु कवि वर्णिंचुट चेत वारुंड वच्चुनु. ई चदरंग माडुवारु कायल नेत्ति पेट्टुनट्लु ब्रह्मादुलनु गूड मार्चुचुंदुरु. लक्ष्मीनारायणुल कोक लील यिदि. इट्टि लक्ष्मि स्वामिभार्य. चराचर प्रपंचमुनु सृजिंचु ब्रह्मदेवु डीतनि कोडुकु. स्वामि : एदो चिन्न ग्रंथमुलंदु स्तुतिंपबडिन दानिनि चूचि . नन्नु घनुडनि तलंपनगुना? कुल : स्वामी! अपौरुषेयमुलैन वेदमुले निन्नु प्रस्तु- तिंचुचुन्नवि. नी पनिवारु देवतलु. साधारण प्रभुनि వలన स्वल्पफलमु लभिंचुनु. नी प्रसा- दमुवलन सकलानर्धमुलु तोलगि मुक्ति कलुगुनु. नी सामर्थ्यमुनु जूपवलयु ननिन अनंत कोटि ब्रह्मांडमुलनु सृष्टिंचेदवु. इट्टि नी युनिकि वैकुं- ठमयिननु, नी सौलभ्यमुनु देलुपुचु भूलोकमुन नवतरिंचितिवि. नी तल्लि देवकि. अर्जुनुडु नी चेलिकाडु. अतनिकि सारथ्यमु चेसितिवि. आ संगति शाश्वतमुग लोकमुन नेगडियुंडुटकु पार्थसारथि पेरुपेत्तु- कोनि नी भक्तवात्सल्यमुनु वेल्लडिंचितिवि. ई संगति तप्प मऱियॊकटि ने नेऱुगनु. 33 कृष्णो रक्षतु नो जगत्त्रयगुरुः कृष्णं नमस्या म्यहं कृष्णे नामरशत्रवो विनिहताः कृष्णाय तस्मै नमः, कृष्णादेव समुत्थितं जगदिदं कृष्णस्य दासोऽस्म्यहं कृष्णे तिष्ठति सर्वमेत दखिलं हे कृष्ण रक्षस्व माम्.