भारतकोश
मुकुन्दमाला स्तोत्रम् (कुलशेखर आलवार - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)

मुकुन्दमाला स्तोत्रम् (कुलशेखर आलवार - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)

Mukundamala Stotram of Kulasekhara Alwar with Commentary

कुलशेखर आलवार (राजा कुलशेखर) द्वारा

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मुकुन्दमाल 139 35 नमामि नारायणपादपंकजं करोमि नारायणपूजनं सदा, वदामि नारायणनाम निर्मलं स्मरामि नारायणतत्त्व मव्ययम्. (अहं=नेनु) नारायण पादपंकजं=श्रीमन्नारायणमूर्ति यॊक्क कमलमुलवंटि पादमुलनु, नमामि=नमस्करिंचुचुन्नानु, सदा=ऎल्लप्पुडु, नारायणपूजनं = विष्णुपूजनु, करोमि = चेयुचु न्नानु, निर्मलं=दोषरहितमैन, नारायणनाम=श्रीमन्नारायणुनि नाममुनु, वदामि=चॆप्पुचुन्नानु. अव्ययं=नाश रहितमैन, नारा यणतत्त्वं=विष्णुडनु परतत्त्वमुनु, स्मरामि=तलंचुचुन्नानु. कुलशेखरुलु पूर्वश्लोकमुन संसारसागरमुन बडि अल्लाडुचुंडु तन्नु उद्धरिंपुमनि प्रार्थिंचि ई श्लोकमुन तनयॊक्क नीचत्वमुनु, नारायणुनियॊक्क परत्वमुनु वॆल्लडिंचुटकु नारायणुनि पाद पंकजमुलकु नमस्कार मनिरि. नमस्कारमुलु मानसिक वाचिक कायिकमुलनि मूडु विधमुलु. नमस्करिंप वलयुननि मनसुतो दलचि, अट्लु चेसॆद ननि वाक्कुतो जॆप्पि, कायमुतो जेयुवఁ दुनु. केवलमु नमस्करिंचिन मात्रमुतो तृप्तिपडक सूर्युनकु दीप मुवलॆ तम चिन्नतनमुनु दॆलुपुटकै सदा नारायणुनि पूज चेसॆद ननिरि. नमस्करिंचुट, पूजिंचुट अनु कार्यमुलु तिरुवा राधन गृहमुलोनि कार्यमुले यगुटचेत -- यद्य दाचरति श्रेष्ठः तत्तदेवेतरो जनः स यत्प्रमाणं कुरुते लोक स्तदनुवर्तते.