भारतकोश
मुकुन्दमाला स्तोत्रम् (कुलशेखर आलवार - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)

मुकुन्दमाला स्तोत्रम् (कुलशेखर आलवार - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)

Mukundamala Stotram of Kulasekhara Alwar with Commentary

कुलशेखर आलवार (राजा कुलशेखर) द्वारा

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22 मुकुन्दमाल अट्लु कर्त, कारयित स्वामियेगान चेयिंचुमनि चेप्पुटलो स्वातं त्र्यमुन्दुन ल्लंघनमुगुनु. आ दोषमु कलुग कुण्डुटकै कुलशेखरुलु 'कुरु' अनिरि. आत्मक्षेमार्थमु भगवंतुडु ओक्कॊक्कनि नोट वसिंचि, तन नाम मुनु ताने उच्चरिंप वलसिन यक्कर येमुन्न दनगा बिड्डकु क्षेममु गलिगिंचुटकै तल्लि पथ्यमुग नुण्डुनट्लु, मातृस्थानमुन नुण्डु भगवंतुडु आत्मयॊक्क क्षेमार्थमु तन नाममु नुच्चरिं चुटयुनु विधीयै युन्नदि. श्रीरामचंद्रुडु समीपमं दुण्डगा सेतुवु कट्टुट यनु चिन्न कार्यमु चेयबडेनु. आतनि नाममु नोटगलवारु संसार सागरमुने दाट समर्थुलगुचुन्नारु. इत्यादि कारणमुलचेत भगवंतुडु तन नामोच्चारणनु कृपचेयवलयुननि तॆलियुचुन्नदि. कुलशेखरु लिट्लु प्रार्थिंपगा 'ए समयमन्दु ना नामोच्चारण चेयवलयुन'नि भगवंतुनिकी संशयमु कलिगॆनु. "प्रति पदं कुरु मे मुकुन्द" यनि कुलशेखरुलु प्रार्थिंचिरि. प्रतिपद मनगा "स्वामी! ऒक्कॊक कालमु नन्दुनु प्रतिवाक्यमुनन्दुनु, प्रति श्लोकमुनन्दुनु-- नैव किंचि त्करोमीति युक्तो मन्येत तत्त्ववित्, पश्यन् शृण्वन् स्पृशन् जिघ्र न्नश्नन् गच्छन् स्वपन् श्वसन्. -- गीत. 5,8 प्रलपन् विसृजन् गृह्णा न्नुन्मिष न्निमिष न्नपि, इन्द्रियाणीन्द्रियार्थेषु वर्तन्त इति धारयन्. -- गीत. 5.9 अनि नुडिविन प्रकारमु प्रतिकार्यमुनन्दुनु, प्रतिस्थानमुनन्दुनु, प्रतिवस्तुवुनु जूचिनपुडुनु भगवत्सन्निधान मुन्नदनि तलचुनट्लु चेयु मनि यर्थमु.