मुकुन्दमाला स्तोत्रम् (कुलशेखर आलवार - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)
Mukundamala Stotram of Kulasekhara Alwar with Commentary
कुलशेखर आलवार (राजा कुलशेखर) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें42 मुकुन्दमाल 6 दिवि वा भुवि वा ममास्तु वासो नरके वा नरकान्तक प्रकामम्, अवधीरित शारदारविन्दौ चरणौ ते मरणेऽपि चिन्तयामि. नरकान्तक = नरकासुरुनि संहरिञ्चिन स्वामी! मम = नाकु, दिवि वा = स्वर्गमन्दुगानि, भुवि वा = भूलोकमन्दुगानि, नरके वा = नर कमुनन्दुगानि, वासः = उनिकि, अस्तु = कलुगनि, प्रकामम् = सम्मतमे, अवधीरित = तिरस्करिम्पबडिन, शारद = शरदृतुवु नन्दु विकसिञ्चिन, अरविन्दौ = कमलमुलुगल, ते = देवरवारि योक्य्क, चरणौ = पादमु लनु, मरणेऽपि = मृत्युसमयमुनन्दुगूड, चिन्तयामि = ध्यानिञ्चु चुन्दुनु. नरकासुरुनि संहरिञ्चिनवाडा! नाकु स्वर्गमन्दैननु, भूमियं दैननु, नरकमन्दैननु वासमु कलुगुनुगाक! चिन्तलेदु. शरत्काल कमलमुलनु तिरस्करिञ्चुनट्टि नीयोक्कि पादमुलनु मरणकालमु नन्दुनु मिगुल स्मरिञ्चुचुन्दुनु गाक! स्वामि : धर्मार्थकाममुलनु वलदनुचुन्नावु. धर्ममु चेयनि पक्षमुन स्वर्गमु लभिञ्चदु.न्दुचेत भूमियन्दे वासमु गलुगुनु. अन्तमात्रमे कादु. धनलोभमु द्वारा चेयु पापमुलवलन नरकवासमु गलुगुनु. कुल : स्वामी! नाकु स्वर्गमन्दैननु, भूमियन्दैननु, नर कमं दैननु वासमु कलुगुगाक! नाकु ई लोकमु, आ लोकमु अनु व्यवस्थ युण्डिनगदा? अन्नियु समानमे. स्वामि : यदि मोसपु माटगा नुन्नदि. कनि नी मनःपूर्वकमैन माटगा नुण्डलेदु. कुल : नरकान्तका! अत्यन्तमु सम्मतिञ्चि चेप्पुचुन्नानु.